Ethanol Production: जैसे-जैसे भारत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ा रहा है लोगों की दिलचस्पी इस बात में भी बढ़ रही है कि एथेनॉल आखिर कैसे बनता है और इसे बनाने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. वैसे तो गन्ना और चावल इसके सबसे जाने-माने स्रोत हैं लेकिन एथेनॉल कई दूसरी फसलों से भी बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं कौन सी हैं वे फसलें.

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एथेनॉल कई अलग-अलग फसलों से बनाया जा सकता है

एथेनॉल एक अल्कोहल आधारित बायोफ्यूल है और यह पौधों में मौजूद शुगर या फिर स्टार्च के फर्मेंटेशन से बनता है. गन्ना और चावल के अलावा दुनिया भर के देश स्थानीय उपलब्धता के आधार पर एथेनॉल बनाने के लिए कई तरह के कृषि उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं. 

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भारत में मक्का एथेनॉल उत्पादन के सबसे तेजी से बढ़ते स्रोतों में से एक बनकर उभर रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें स्टार्च की मात्रा ज्यादा होती है और इसे एथेनॉल में बदलने की दर भी अच्छी है. गेहूं, जौ, ज्वार और बाजरा जैसे दूसरे अनाजों का भी आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है. 

अनाज के अलावा स्टार्च वाली फसलें जैसे कि कसावा, आलू और शकरकंद को भी एथेनॉल में बदला जा सकता है. कई एथेनॉल प्लांट खराब या फिर सड़े हुए अनाज का भी इस्तेमाल करते हैं. 

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कौन से स्रोत सबसे अच्छी क्वालिटी का एथेनॉल देते हैं?

अगर इंडस्ट्री के नजरिए से देखें तो पेट्रोल में मिलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्यूल ग्रेड एथेनॉल की शुद्धता 99% से ज्यादा होनी चाहिए. हालांकि कुछ कच्चे माल को प्रोसेस करना आसान होता है और उनसे दूसरों की तुलना में ज्यादा एथेनॉल मिलता है. 

शुद्ध गन्ने के रस को एथेनॉल उत्पादन के लिए सबसे अच्छा स्रोत माना जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से काफी मात्रा में सुक्रोज होता है, इसलिए फर्मेंटेशन आसान होता है और अशुद्धियों काफी कम बनती हैं. इससे रिफायनिंग की प्रक्रिया आसान और ज्यादा कुशल हो जाती है. 

मक्का भी एक उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा माल है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें स्टार्च की मात्रा काफी ज्यादा होती है. स्टार्च को फॉर्मेट होने वाली शुगर में बदलने के लिए मक्के से इथेनॉल की काफी ज्यादा अच्छी रिकवरी दर मिलती है. यही वजह है कि अमेरिका जैसे देश भी मक्के का काफी ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और यह भारत के बायोफ्यूल प्रोग्राम में तेजी से अपनी पकड़ बना रहा है.

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