ईरान के साथ जारी तनावपूर्ण स्थितियों के बीच खुफिया हलकों से एक बेहद सनसनीखेज दावा सामने आया है. सीआईए के पूर्व अधिकारी लैरी जॉनसन ने आरोप लगाया है कि व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु लॉन्च कोड्स (न्यूक्लियर कोड्स) तक पहुंचने की कोशिश की थी. जॉनसन के अनुसार, उस समय मौजूद एक जनरल ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से इन गंभीर आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या इस पर कोई प्रतिक्रिया अब तक नहीं दी गई है. आइए जानें कि अमेरिका में परमाणु हमले का फैसला कौन लेता है.

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अमेरिका में कौन लेता है परमाणु हमले का फैसला?

दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति माने जाने वाले अमेरिका में विनाशकारी हमले का बटन किसके हाथ में है, यह सवाल हमेशा से चर्चा का केंद्र रहा है. अमेरिकी परमाणु प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें निर्णय की शक्ति पूरी तरह से एक व्यक्ति, यानी देश के राष्ट्रपति में निहित है. किसी भी बड़े हमले या जवाबी कार्रवाई का अंतिम फैसला लेने के लिए राष्ट्रपति को संसद या किसी अन्य बाहरी निकाय की मंजूरी की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती है. इस अत्यंत गोपनीय और जटिल प्रक्रिया के पीछे एक सुव्यवस्थित तंत्र काम करता है, जो राष्ट्रपति के हर आदेश को सुरक्षित और त्वरित बनाता है. 

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अधिकार का केंद्रीकरण और राष्ट्रपति की भूमिका

अमेरिकी संवैधानिक और सैन्य ढांचे में परमाणु हथियारों का उपयोग करने का एकल अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है. इस व्यवस्था के अनुसार, राष्ट्रपति को हमले का फैसला लेने के लिए कांग्रेस या किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी से परामर्श करने की वैधानिक अनिवार्यता नहीं है. इसका मुख्य उद्देश्य परमाणु युद्ध जैसी आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय लेना है, जहां हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है. पूर्व मिसाइल लॉन्च अधिकारी ब्रूस ब्ला ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा था कि अमेरिकी मिसाइलें आदेश मिलने के महज एक मिनट के भीतर लॉन्च होने के लिए तैयार रहती हैं. यह व्यवस्था राष्ट्रपति को निर्णय की पूरी स्वायत्तता प्रदान करती है.

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न्यूक्लियर फुटबॉल और काला ब्रीफकेस 

राष्ट्रपति के साथ हर वक्त एक सैन्य सहायक मौजूद रहता है, जिसके हाथ में काले रंग का चमड़े का एक ब्रीफकेस होता है, जिसे 'न्यूक्लियर फुटबॉल' कहा जाता है. यह दिखने में बेहद साधारण लगता है, लेकिन इसमें संचार के बेहद उन्नत उपकरण होते हैं, जो राष्ट्रपति को दुनिया के किसी भी कोने से नेशनल मिलिट्री कमांड सेंटर (NMCC) से जोड़ सकते हैं. इसमें एक विशेष दस्तावेज भी होता है, जिसमें युद्ध की योजनाएं, मिसाइल ठिकानों की जानकारी और संभावित हमलों के ग्राफिक्स शामिल होते हैं. राष्ट्रपति को इन जटिल योजनाओं को बहुत कम समय में समझकर अपनी रणनीति तय करनी होती है.

प्रक्रिया की पुष्टि और गोल्ड कोड की सुरक्षा

जब राष्ट्रपति परमाणु हमले का निर्णय लेते हैं, तो उनकी पहचान और आदेश की पुष्टि 'गोल्ड कोड' के जरिए की जाती है. यह कोड एक प्लास्टिक कार्ड पर दर्ज होता है, जिसे 'द बिस्किट' कहा जाता है. राष्ट्रपति को नेशनल मिलिट्री कमांड सेंटर को अपनी पहचान प्रमाणित करनी होती है, ताकि आदेश की प्रामाणिकता सुनिश्चित हो सके. यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय है. राष्ट्रपति के पास हमले के विभिन्न विकल्प होते हैं, जिन्हें वे अपनी आवश्यकतानुसार चुन सकते हैं. एक बार आदेश जारी होने के बाद, यह सैन्य तंत्र में नीचे तक पहुंच जाता है और मिसाइल लॉन्च की तैयारी शुरू हो जाती है.

क्या रक्षा सचिव रोक सकता है परमाणु हमला? 

अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कोई रक्षा सचिव राष्ट्रपति के परमाणु आदेश को रोक सकता है? इसका उत्तर यह है कि रक्षा सचिव की भूमिका केवल आदेश को सत्यापित (verify) करने तक सीमित है. उनके पास राष्ट्रपति के निर्णय को वीटो करने या उसे पूरी तरह से रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. रक्षा सचिव यह पुष्टि करते हैं कि आदेश वास्तव में राष्ट्रपति द्वारा ही दिया गया है, लेकिन वे स्वयं सैन्य नीति में राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद से ऊपर नहीं हैं. यह स्पष्ट करता है कि अंतिम निर्णय पूरी तरह से निर्वाचित राष्ट्रपति की जिम्मेदारी है.

राष्ट्रपति के पास जवाबी कार्रवाई का अधिकार

यदि अमेरिका पर किसी अन्य देश द्वारा परमाणु हमला किया जाता है, तो राष्ट्रपति के पास तुरंत जवाबी कार्रवाई करने का पूर्ण अधिकार है. ब्रूस ब्ला जैसे विशेषज्ञों ने बताया है कि मिसाइल लॉन्च ठिकानों पर तैनात अधिकारियों को हर पल कंप्यूटर मॉनिटर पर निगरानी रखनी पड़ती है. जैसे ही राष्ट्रपति से आदेश मिलता है, प्रतिक्रिया का समय इतना कम होता है कि उसमें कोई चूक संभव नहीं है. यह प्रणाली इस तरह से डिजाइन की गई है कि दुश्मन को जवाब देने में अमेरिका को एक पल का भी विलंब न हो. यह शक्ति जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही जिम्मेदारी से भरी हुई है.

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