America Attacks On Venezuela: हाल ही में अमेरिका ने एक बड़ी मिलिट्री कार्रवाई करते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया. निकोलस को सीधे न्यूयॉर्क ले जाया गया. आपको बता दें कि वेनेजुएला में सऊदी अरब से भी ज्यादा तेल भंडार है. इसी बीच आइए जानते हैं उन देशों के बारे में जिनके पास तेल का अकूत भंडार है और उन पर अमेरिका हमला कर चुका है.
वेनेजुएला
3 जनवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व के तहत वेनेजुएला में एक सैन्य अभियान शुरू किया. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया. आधिकारिक तौर पर इस ऑपरेशन को नार्को आतंकवाद पर कार्रवाई के रूप में बताया गया. आपको बता दें कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. यहां 300 बिलियन बैरल से भी ज्यादा तेल भंडार है.
इराक
2003 में इराक पर आक्रमण 21वीं सदी की सबसे बड़ी अमेरिकी सैन्य कार्यवाही में से एक है. वाशिंगटन ने यह दावा करके युद्ध को सही बताया था कि इराक के पास सामूहिक विनाश के हथियार थे. हालांकि यह दावे बाद में झूठे साबित हुए. हालांकि इराक दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है. सद्दाम हुसैन के पतन के बाद इराक के पहले से राष्ट्रीयकृत तेल क्षेत्र को विदेशी निवेश के लिए खोल दिया गया.
लीबिया
2011 में अमेरिका नाटो के लीबिया में सैन्य हस्तक्षेप में शामिल हो गया. इसके बाद मुअम्मर गद्दाफी को उखाड़ फेंका गया और मार दिया गया. आपको बता दें कि लीबिया के पास अफ्रीका का सबसे बड़ा तेल भंडार है. गद्दाफी के पतन के बाद देश लंबे समय तक अस्थिरता और गृह युद्ध में फंस गया. इस वजह से तेल उत्पादन काफी ज्यादा प्रभावित हुआ.
ईरान
1953 में अमेरिका ने ईरान पर हमला नहीं किया लेकिन उसने ऑपरेशन एजैक्स के जरिए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग को हटाने में एक बड़ी भूमिका निभाई. वाशिंगटन की नजर में मोसादेग का सबसे बड़ा अपराध ईरान के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण करना था. इस तख्तापलट ने शाह को सत्ता में वापस ला दिया और दशकों तक ईरानी तेल तक पश्चिमी देशों की पहुंच मजबूत की.
कुवैत
1991 का खाड़ी युद्ध इराक द्वारा कुवैत पर हमले की वजह से शुरू हुआ था, जो की एक छोटा लेकिन तेल से भरा हुआ देश था. अमेरिका ने इराकी सेना को बाहर निकालने के लिए एक वैश्विक गठबंधन को लीड किया. हालांकि इस ऑपरेशन को संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा के रूप में पेश किया गया था लेकिन एक बड़ी रणनैतिक चिंता वैश्विक तेल आपूर्ति की रक्षा करना और सऊदी अरब के तेल क्षेत्र को सुरक्षित रखना था.
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