Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के बारामती के पास एक बड़ा हादसा हो गया. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान क्रैश हो गया और इसमें अजीत पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई. जांच एजेंसियों ने दुर्घटना की वजह की जांच शुरू कर दी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या अजीत पवार के प्लेन में ब्लैक बॉक्स था या नहीं.

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क्या अजीत पवार के विमान में ब्लैक बॉक्स था 

दुर्घटना में शामिल विमान एक लियरजेट 45 था. इसमें ब्लैक बॉक्स लगा हुआ था. इसमें फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर दोनों थे. ऐसा बताया जा रहा है की जांच टीम ने दुर्घटना स्थल से ब्लैक बॉक्स को बरामद कर लिया है. यह डिवाइस स्पीड, ऊंचाई, इंजन, परफॉर्मेंस और कंट्रोल इनपुट जैसी जरूरी तकनीकी डेटा के साथ क्रैश से ठीक पहले के आखिरी पलों में कॉकपिट की बातचीत की रिकॉर्डिंग भी देगा. इन डिटेल से यह पता लगेगा की दुर्घटना तकनीकी खराबी, मौसम की स्थिति या फिर मानवीय गलती में से किस वजह से हुई है. 

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क्या होता है ब्लैक बॉक्स 

हालांकि इसका नाम ब्लैक बॉक्स होता है लेकिन यह काला नहीं होता. इसे चमकीले नारंगी रंग से रंगा जाता है ताकि इसे मलबे या फिर मुश्किल इलाकों में आसानी से ढूंढा जा सके. आधिकारिक तौर पर इसे फ्लाइट रिकॉर्डर कहा जाता है. टाइटेनियम या फिर कठोर स्टील जैसी मजबूत सामग्री से बना यह ब्लैक बॉक्स 1100 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान और भारी प्रभाव बलों को झेल सकता है. इसे आमतौर पर विमान की पूंछ के पास लगाया जाता है. ऐसे इसलिए क्योंकि इस हिस्से के क्रैश होने के दौरान बरकरार रहने की संभावना ज्यादा होती है.

ब्लैक बॉक्स के दो हिस्से

ब्लैक बॉक्स में दो अलग-अलग सिस्टम होते हैं. फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर स्पीड, ऊंचाई, ईंधन प्रवाह, इंजन की स्थिति और नियंत्रण स्थिति जैसी तकनीकी मापदंड को कैप्चर करता है. इसी के साथ कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर पायलट की बातचीत, चेतावनी अलार्म और कॉकपिट की बैकग्राउंड आवाजों को रिकॉर्ड करता है. 

सभी प्राइवेट प्लेन में ब्लैक बॉक्स क्यों नहीं होता 

हर प्राइवेट विमान में ब्लैक बॉक्स होना जरूरी नहीं है. काफी छोटे विमान जिनमें एक से चार सीट होती है उन्हें जगह और वजन की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है. परफॉर्मेंस या फिर सेफ्टी पर असर डाले बिना एक भारी और क्रैश रेजिस्टेंट रिकॉर्डर लगाना मुमकिन नहीं होता.

इसी के साथ एक स्टैंडर्ड ब्लैक बॉक्स सिस्टम उसके सर्टिफिकेशन और मेंटेनेंस के साथ 60000 डॉलर से भी ज्यादा का हो सकता है. छोटे प्राइवेट विमान के लिए यह प्लेन की कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा हो सकता है. भारत में डीजीसीए मुख्य रूप से कमर्शियल विमान और बड़े कॉर्पोरेट जेट के लिए ब्लैक बॉक्स को जरूरी बनाता है.

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