Gen Alpha In India Population: उत्तर प्रदेश, गुजरात और पंजाब समेत सात राज्यों के आगामी चुनावों में 18 से 29 साल का जेन-जी मतदाता अपनी ताकत दिखाने को पूरी तरह तैयार है. चाहे जंतर-मंतर का छात्र और युवा आंदोलन हो या फिर झारखंड का, दोनों ने साफ कर दिया है कि नई उम्र के वोटर्स का राजनीतिक रुझान क्या है और वे सही चीज के लिए अपना हक मांगना जानते हैं. हालांकि असली कहानी इसके आगे की है, जहां जेन-जी के ठीक पीछे जेन अल्फा की एक भारी-भरकम आबादी कतार में खड़ी है. यह जेनरेशन भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगी. आइए जानते हैं इनकी आबादी का गणित और उनके पहले वोट की टाइमलाइन क्या होगी.

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7 राज्यों का दंगल और युवा शक्ति का प्रदर्शन

अगले साल उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन चुनावी राज्यों में युवा मतदाता सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रहे हैं जिनको जेन-जी कहा जा रहा है. हाल के समय में दिल्ली के जेन-जी प्रदर्शन और झारखंड में हुए छात्र आंदोलनों ने देश में नई बहस छेड़ दी है. इन घटनाओं से साफ जाहिर होता है कि 18 से 29 साल की उम्र वाले युवा अब राजनीति को केवल दूर से देखने के बजाय सीधे प्रभावित करेंगे.

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कौन हैं 'मिनी मिलेनियल्स' या जेन अल्फा?

वर्ष 2010 से 2024 के दौरान जन्म लेने वाले बच्चों को जनरेशन अल्फा का नाम दिया गया है. यह इंसानी इतिहास की पहली ऐसी पीढ़ी मानी जा रही है, जिसका जन्म पूरी तरह से इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधुनिक दौर में हुआ है. इनके माता-पिता ज्यादातर मिलेनियल्स हैं, जिसकी वजह से इस नई पीढ़ी के बच्चों को कई बार मिनी मिलेनियल्स कहकर भी बुलाते हैं. तकनीक इनके जीवन में बाद में नहीं आई, बल्कि यह इनके जन्म के साथ ही मौजूद थी.

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कैसे पड़ा यह जेन अल्फा नाम?

जनरेशन अल्फा शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले साल 2008 में ऑस्ट्रेलिया के मशहूर शोधकर्ता मार्क मैक्रिंडल ने किया था. इससे पहले की पीढ़ियों के नाम अंग्रेजी अक्षरों जैसे जेन एक्स, जेन वाई और जेन जी पर रखे गए थे. जब अंग्रेजी के अक्षर खत्म हो गए, तो ग्रीक वर्णमाला के पहले अक्षर अल्फा से इस नई पीढ़ी की शुरुआत की गई. इस तरह यह ग्रीक नाम पाने वाली पहली जेनरेशन बन गई.

भारत में जनरेशन अल्फा का कितना बड़ा हिस्सा?

अगर भारतीय आबादी के लिहाज से देखें तो जेन अल्फा का आकार बहुत बड़ा है. देश में इस पीढ़ी के बच्चों की अनुमानित संख्या 32.7 करोड़ से लेकर 41.7 करोड़ के बीच है. इसका सीधा सा मतलब यह है कि भारत की पूरी आबादी का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा केवल इसी उम्र वर्ग का है. आंकड़े बताते हैं कि 0 से 17 साल की उम्र वाले इन बच्चों की बदौलत भारत लंबे समय तक सबसे युवा आबादी वाला देश बना रहेगा.

जेन-अल्फा के बैलेट बॉक्स तक पहुंचने का टाइमटेबल

भारत के कानूनी नियमों के अनुसार वोट डालने की न्यूनतम उम्र 18 साल तय है. इस नियम के हिसाब से जेन अल्फा के बच्चे साल 2028 से 2042 के बीच वोटर बनने के योग्य होंगे. इस पीढ़ी के सबसे बड़े बच्चे, जिनका जन्म 2010-2011 में हुआ था, वे साल 2028-2029 तक 18 साल के हो जाएंगे. यानी 2029 के लोकसभा चुनाव में इनका एक छोटा हिस्सा पहली बार मतदान करेगा. वहीं 2024 में पैदा हुए सबसे छोटे बच्चे साल 2042 में जाकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाएंगे. इस तरह 2035 के बाद के चुनावों में इस पीढ़ी की सबसे बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी.

जेन अल्फा की खासियत

जेन अल्फा की सबसे अलग बात यह है कि इन्होंने स्क्रीन और डिजिटल डिवाइसेस को बहुत कम उम्र में ही समझ लिया है. टैबलेट, स्मार्ट टीवी, ऑनलाइन क्लासरूम और वीडियो कॉलिंग इनके लिए रोजमर्रा की सामान्य बातें हैं. इसके अलावा, इनके माता-पिता द्वारा सोशल मीडिया पर बचपन से ही तस्वीरें और वीडियो शेयर करने के कारण, इनकी पहचान जन्म लेते ही इंटरनेट पर दर्ज हो जाती है. यह आदत इन्हें पिछली सभी पीढ़ियों से एकदम अलग बनाती है.

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