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कॉकरोच से लेकर इश्क करो पार्टी तक... देश में अजीबोगरीब नाम की कितनी पार्टियां? जानें डिटेल्स

देश में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद अब मार्केट में ‘इश्क करो पार्टी’ की चर्चा है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने खुद इसका प्रचार किया है. आइए जानें कि देश में कितनी अजीब नाम वाली पार्टियां हैं.

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  • जस्टिस काटजू के प्रचार से 'इश्क करो पार्टी' सुर्खियों में आई.
  • 2300 से अधिक अजीब नाम वाली पार्टियां देश में पंजीकृत.
  • चुनाव आयोग में 2854 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल पंजीकृत.

भारतीय राजनीति हमेशा से ही अपने अनोखे अंदाज, दिलचस्प मोड़ों और विविधताओं के लिए जानी जाती रही है. लेकिन इन दिनों देश के राजनैतिक और युवा विमर्श में सोशल मीडिया के गलियारों से निकलकर कुछ बेहद अजीबोगरीब नाम सुर्खियां बटोर रहे हैं. दिल्ली की सड़कों पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा किए गए वास्तविक प्रदर्शनों के बाद अब इंटरनेट की दुनिया में 'इश्क करो पार्टी' की धमाकेदार एंट्री हुई है. सोशल मीडिया पर इस नई पार्टी को लेकर चर्चाएं तब और तेज हो गईं जब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने खुद इस नाम का प्रचार कर डाला. आइए जानें कि देश में अजीबोगरीब नाम की कितनी पार्टियां हैं. 

अतरंगी नामों की लंबी फेहरिस्त

देश में तकरीबन 2300 ऐसी पॉलिटिकल पार्टियां हैं जिनके नाम किसी फिल्मी कहानी या मजाकिया मुहावरों जैसे लगते हैं. इन अतरंगी नामों की सूची में 'अपनी जिंदगी अपना दल', 'गरीब आदमी पार्टी', 'तुम्हारी-मेरी पार्टी' और 'रायता भारत पार्टी' जैसे दल शामिल हैं. इतना ही नहीं, 'पिरामिड पार्टी ऑफ इंडिया', 'ऑल पेंशनर्स पार्टी', 'लेमैन पार्टी' और 'वोटर्स इंडिपेंडेंट पार्टी' जैसी पार्टियां भी बकायदा चुनाव आयोग की सूची में रजिस्टर्ड हैं. इन नामों को देखकर ऐसा लगता है जैसे इन्हें किसी गंभीर राजनैतिक विचार के बजाय बस यूं ही रख दिया गया हो.

हर वर्ग के नाम पर बनी पार्टियां

सियासत के इस अजीब खेल में समाज के अलग-अलग वर्गों और भावनाओं को समेटने की भी कोशिश की गई है. चुनाव आयोग की लिस्ट में 'गरीब बेरोजगार विकास पार्टी', 'देवता दल', 'अंजान आदमी पार्टी' और 'अपना किसान पार्टी' के नाम भी दर्ज हैं. इसके साथ ही 'भारतीय महापरिवार पार्टी', 'राष्ट्रीय साफ नीति पार्टी', 'बहुजन हसरत पार्टी' और 'आपकी अपनी पार्टी' जैसे नाम भी चुनाव आयोग के दस्तावेजों की शोभा बढ़ा रहे हैं. सबसे मजेदार बात यह है कि देश में 'सबसे बड़ी पार्टी' नाम से भी एक वास्तविक राजनैतिक दल पंजीकृत है.

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अजीब दावों और मुद्दों वाली पार्टियां

इस फेहरिस्त का अंत यहीं नहीं होता, बल्कि कुछ नाम तो सामाजिक मुद्दों और अनोखे दावों को लेकर बनाए गए हैं. इनमें 'स्वच्छ स्वस्थ स्वावलंबीजन पार्टी' और 'मजदूर किराएदार विकास पार्टी' जैसे नाम आते हैं. वहीं युवाओं और प्रेमियों की पैरवी करने का दावा करने वाली 'इंडियन लवर्स पार्टी' और बेहद दार्शनिक नाम वाली 'रिलिजन ऑफ मैन रिवॉल्विंग पॉलिटिकल पार्टी ऑफ इंडिया' जैसी पार्टियां भी कागजों पर अपना वजूद रखती हैं. यह सब मिलकर भारतीय लोकतंत्र की एक ऐसी अनूठी और रंग-बिरंगी तस्वीर पेश करता है, जिसे देखकर कोई भी हैरान हुए बिना नहीं रह सकता.

चुनाव आयोग के आंकड़े क्या कहते हैं? 

इस सोशल मीडिया ट्रेंड के बीच जब हम भारत के वास्तविक राजनैतिक ढांचे पर नजर डालते हैं, तो बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आते हैं. भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, देश में राजनैतिक दलों की संख्या उम्मीद से कहीं ज्यादा है. मौजूदा समय में आयोग के पास कुल 2854 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दल दर्ज हैं. चुनाव आयोग में पंजीकृत इन्हीं अनगिनत छोटे-छोटे दलों में से कई पार्टियों के नाम ऐसे हैं, जिन्हें सुनकर आम जनता हैरान रह जाती है. ये नाम रोज की आम बोलचाल में काफी अजीब और गुदगुदाने वाले लगते हैं.

देश में दलों का पूरा वर्गीकरण

भारत की विशाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर राजनैतिक पार्टियों को उनकी सक्रियता और जनाधार के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है. चुनाव आयोग के पास जहां 2854 गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनैतिक दल मौजूद हैं, वहीं देश में मजबूत जमीन रखने वाले 67 प्रादेशिक या राज्य स्तरीय दल भी सक्रिय हैं. इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पैठ रखने वाले कुल 6 मुख्य राष्ट्रीय दल पंजीकृत हैं. वास्तविक धरातल पर सक्रिय इन बड़े राष्ट्रीय और प्रादेशिक दलों के बीच ही चुनाव आयोग की फाइलों में ये हजारों अजीब नाम वाले दल दबे हुए हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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