आज के दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है. बिजनेस से लेकर बैंकिंग और अन्य जरूरी कामों में स्मार्टफोन का उपयोग किया जाता है. ऐसे समय में अगर कोई बड़ा कारोबारी खुद मोबाइल फोन ही न रखता हो, तो यह बात हैरान करने वाली बात है. भारत में ऐसे ही कारोबारी हैं राममूर्ति त्यागराजन, जो श्रीराम ग्रुप के संस्थापक के तौर पर जाने जाते हैं. आइए जानते हैं राममूर्ति त्यागराजन के फोन न रखने की वजह.

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सादगी से जीना पसंद करते हैं

राममूर्ति त्यागराजन को उनकी सादगी भरी जीवनशैली के लिए भी जाना जाता है. कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखते. उनका मानना रहा है कि मोबाइल उनके लिए एक तरह का ध्यान भटकाने वाला साधन होता है. इसके अलावा, रिपोर्टों में उनके साधारण घर में रहने और करीब 6 लाख रुपये की कार इस्तेमाल करने के बारे में भी सुना गया है.

गणित की पढ़ाई से वित्तीय कारोबार तक

राममूर्ति त्यागराजन का जन्म तमिलनाडु के एक किसान परिवार में हुआ था. उन्होंने चेन्नई में गणित की पढ़ाई की और इसके बाद इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट, कोलकाता में आगे की पढ़ाई पूरी की. वर्ष 1961 में उन्होंने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से अपने करियर की शुरुआत की. आगे चलकर उन्होंने बैंकिंग और री-इंश्योरेंस से जुड़े क्षेत्रों में भी काम किया. उनके करियर में बड़ा बदलाव तब आया, जब उन्होंने देखा कि छोटे कारोबारी और खासकर ट्रक ड्राइवरों जैसे कम आय वाले लोगों को बैंक से कर्ज लेने में परेशानी होती है. उन्होंने इस वर्ग की जरूरत को समझा और कम आय वाले ग्राहकों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया.

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1960 के दशक में रखी श्रीराम की नींव

इसी सोच के आधार पर त्यागराजन ने अपने साथियों और परिवार के सदस्यों के साथ श्रीराम चिट्स की शुरुआत की. समूह ने बाद में वाहन वित्त, बीमा, स्टॉकब्रोकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं में भी अपनी मौजूदगी बनाई. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2006 में उन्होंने श्रीराम कंपनियों में अपनी पूरी हिस्सेदारी कर्मचारियों के लिए बनाए गए Shriram Ownership Trust को दे दी थी. राममूर्ति त्यागराजन की खास बात ही यही है कि उन्होंने बड़े कारोबार का निर्माण करने के बावजूद बेहद सादा जीवन जीने का विकल्प चुना. मोबाइल फोन से दूरी रखना भी उनकी इसी जीवनशैली का हिस्सा बताया जाता है.

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