8th Pay Commission: 8वां वेतन आयोग अपनी सिफारिशों का अंतिम रूप देने के करीब पहुंच रहा है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों में वेतन में भारी बढ़ोतरी के साथ-साथ एरियर मिलने की भी उम्मीदें बढ़ रही हैं. यह आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो चुका है. हालांकि इसकी रिपोर्ट जमा होने और लागू होने में अभी 14 से 18 महीने और लग सकते हैं. इसी देरी की वजह से बड़े बकाया भुगतान की संभावना बनती है. आइए जानते हैं कि जिन कर्मचारियों का मूल वेतन ₹18000 है उन्हें कितना एरियर मिल सकता है. 

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क्या है एरियर की कैलकुलेशन? 

अनुमानित एरियर मुख्य रूप से उस फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करता है जिसे सरकार मंजूरी देती है. अगर लागू होने में लगभग 20 महीने की देरी होती है तो कर्मचारियों को उस पूरी अवधि के लिए उनके पुराने वेतन और संशोधित वेतन के बीच का अंतर मिलेगा. यही जमा हुआ अंतर एरियर के रूप में सामने आता है.

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अगर इसकी कैलकुलेशन की बात करें तो नई सैलरी+नए भत्ते और पुरानी सैलरी+पुराने भत्ते के बीच के अंतर को देरी वाले महीनों की संख्या से गुणा किया जाता है.  यानी कि इसकी गणना में संशोधित सैलरी में से मौजूदा सैलरी को घटाकर बकाया भुगतान वाले महीनों की संख्या से गुणा किया जाता है.

अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के तहत कितना होगा वेतन? 

अगर 1.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है तो मूल वेतन ₹18000 से बढ़कर लगभग ₹32,940 हो सकता है. 1.92 के फैक्टर के साथ यह बढ़कर ₹34,560 हो सकता है. इसी के साथ 2.28 का फैक्टर इसे ₹41,040 तक पहुंचा सकता है. 2.46 पर संशोधित वेतन ₹44,280 तक पहुंच सकता है. इसी के साथ 2.86 जैसा फैक्टर मंजूर किया जाता है तो नया मूल वेतन बढ़कर ₹51,480 तक जा सकता है. हालांकि कर्मचारी संघ 3.0 से 3.25 के बीच काफी ऊंचा फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहा है. इससे वेतन संभावित रूप से लगभग ₹54000 तक पहुंच सकता है.

कितना होगा एरियर?

एरियर की गणना 1 जनवरी 2026 से रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट के आधार पर की जाती है. अगर नई वेतन संरचना लगभग 20 महीने की देरी के बाद लागू की जाती है तो कर्मचारियों को इस पूरी अवधि का पिछला वेतन मिलेगा. फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा पुराने और नए वेतन के बीच का अंतर उतना ही बड़ा होगा. यही वजह है कि अनुमानों के मुताबिक यह रकम ₹3.6 लाख से ₹5.65 लाख के बीच हो सकती है. 

महंगाई भत्ते का क्या होता है? 

जैसे ही नया वेतन आयोग लागू होता है महंगाई भत्ता शून्य पर रीसेट हो जाता है. इसके बाद इसकी गणना नई मूल सैलरी के आधार पर दोबारा की जाती है. यानी कि भविष्य में होने वाली वेतन वृद्धि एक ऊंचे आधार से शुरू होगी. इससे कुल कमाई में और भी ज्यादा बढ़ोतरी होगी.

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