8th Pay Commission: भारत में आठवें वेतन आयोग की चर्चा जोड़ पकड़ने के साथ कई लोग यह सोच रहे हैं कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में सरकारी कर्मचारियों का वेतन कैसे संशोधित किया जाता है. दरअसल भारत के उलट पाकिस्तान स्थायी वेतन आयोग मॉडल का पालन नहीं करता. जहां निश्चित अंतराल पर वेतन संशोधन की सिफारिश नहीं की जाती. इसके बजाय देश की वेतन संरचना काफी हद तक वार्षिक बजट घोषणा और आर्थिक स्थिति के आधार पर सरकारी नीतिगत फैसलों के जरिए से तय होती है. 

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कोई स्थायी वेतन आयोग प्रणाली नहीं 

पाकिस्तान में भारत की प्रणाली के जैसा कोई भी स्थायी वेतन आयोग नहीं है. यहां वेतन पेंशन और भत्तों में व्यापक संशोधन की सिफारिश करने के लिए समय-समय पर एक आयोग का गठन नहीं किया जाता है.

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यहां सरकारी कर्मचारियों का वेतन राष्ट्रीय वेतनमान और अलग-अलग सरकारी अधिसूचना के जरिए कंट्रोल किया जाता है. वेतन में किसी भी वृद्धि की घोषणा आमतौर पर सालाना संघीय बजट के दौरान इन्फ्लेशन, सरकारी वित्त और समग्र आर्थिक स्थिति पर विचार करने के बाद की जाती है.

राष्ट्रीय वेतनमान मूल वेतन तय करता है 

पाकिस्तान में सरकारी कर्मचारियों को एक एकीकृत मूल वेतनमान के तहत रखा जाता है. यह ग्रेड 1 से ग्रेड 22 तक होता है. हर ग्रेड में एक तय वेतन संरचना, वार्षिक वेतन वृद्धि और पदोन्नति लाभ होते हैं. किसी भी कर्मचारी का मूल वेतन उनके ग्रेड, सेवा की साल और राष्ट्रीय वेतनमान के तहत लागू आर्थिक वेतन वृद्धि पर तय करता है. 

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वेतन वृद्धि वार्षिक बजट के जरिए आती है 

भारत के उलट जहां आयोग के कार्यान्वयन के परिणाम स्वरुप कई सालों के बाद वेतन संशोधन हो सकता है पाकिस्तान आमतौर पर संघीय बजट के हिस्से के रूप में हर साल वेतन वृद्धि की घोषणा करता है. सरकार इन्फ्लेशन, राजस्व संग्रह, राजकोषीय घाटे और दूसरे आर्थिक संकेतकों का आकलन करने के बाद वृद्धि का प्रतिशत तय करती है.

तदर्थ राहत भत्ता एक बड़ी भूमिका निभाता है 

हर बार पूरी वेतन संरचना को संशोधित करने के बजाय पाकिस्तान अक्सर सरकारी कर्मचारियों को तदर्थ राहत भत्ता देता है. कर्मचारियों को बढ़ते इन्फ्लेशन और रहने की लागत से निपटने में मदद के लिए यह भत्ता मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में जोड़ा जाता है. सरकार की वित्तीय स्थिति के आधार पर यह भत्ता पिछले कुछ सालों में काफी अलग-अलग रूप से दिया गया है और मूल वेतन का लगभग 10% से 35% तक हो सकता है.

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