भारत में अब तक कोरोना वायरस के 73 केस सामने आ चुके हैं. अब WHO ने कोरोना वायरस को पैनडेमिक यानी कि महामारी घोषित कर दिया है. ऐसे में ये जानना ज़रूरी है कि किस स्थिति में किसी बीमारी को WHO पैनडेमिक यानी महामारी घोषित करता है. बीमारी और महामारी में क्या अंतर है? महामारी उस बीमारी को कहा जाता है जो एक ही समय में  दुनिया के अलग-अलग देशों में एक साथ लोगों के बीच संपर्क से फैलती है. महामारी होने की अधिक संभावना तब होती है जब वायरस बिलकुल नया हो और आसानी से लोगों में संक्रमित हो रहा हो. कोरोना वायरस इन सभी पैमानों को पूरा करता है. अभी तक कोरोना वायरस का कोई इलाज या टीका नहीं है. वायरस के विस्तार को रोकना ही सबसे अहम है. WHO ने अभी तक कोरोना वायरस को पैनडेमिक यानी महामारी घोषित नहीं किया था. लेकिन दुनिया भर में  कोरोना वायरस के बढ़ते हुए केस को देखते हुए अब इसे महामारी घोषित कर दिया गया है. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 124 देशों में अब तक 126,483  मामले सामने आए हैं. करेंटली 53,532 लोग दुनिया भर में कोरोना वायरस से इन्फेक्टेड हैं. दुनिया भर में  68, 315 लोगो ने रिकवर भी किया है. इससे अब तक 4,600 लोगों की मौत हो चुकी है. क्या है महामारी घोषित होने का फायदा? अब समझते  हैं कि किसी भी बीमारी  को  WHO के द्वारा महामारी डिक्लेअर करने पर फायदा क्या होता है? एक बार अगर WHO ने किसी बिमारी को महामारी घोषित कर दिया, उसके बाद ये उम्मीद लगाई जाती है कि दुनिया भर के देशों की सरकारें इसकी तरफ सतर्क होते हुए कड़े कदम उठाएं, जिससे कि इस बीमारी को आगे और फैलने से रोका जा सके. इसे सरकारों  के  लिए एक तरह का रेड अलर्ट मान सकते हैं. आपने अंग्रेजी में एक शब्द सुना होगा एपिडेमिक. अब ये एपिडेमिक और पैनडेमिक में क्या अंतर है? दरअसल एपिडेमिक उस बीमारी को कहा जाता है जो कि एक ही देश, एक समुदाय या क्षेत्र तक सीमित हो. और पैनडेमिक उसे कहा जाता है, जब कोई बीमारी किसी एक देश या सीमा तक सीमित नहीं रहती है और दुनिया के कई देशों में बड़े पैमाने पर फैलने लगती है. जैसे साल 1918 से 1920 तक फैले स्पैनिश फ्लू को महामारी घोषित किया गया था, क्योंकि इससे कई देशों में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे. इससे करोड़ों लोगों की मौत हो गई थी. वहीं 2014-15 में फैले इबोला को एपिडेमिक घोषित किया गया, क्योंकि यह बीमारी लाइबेरिया और पश्चिम अफ्रीका के कुछ पड़ोसी देशों में फैली थी. कब कोई बीमारी घोषित होती है महामारी? इसका कोई निर्धारित पैमाना नहीं होता है कि अगर किसी बीमारी से दुनिया भर में इतनी मौते होती हैं या फिर इतने देश इफ़ेक्ट होते हैं सिर्फ तभी उसे महामारी या अंग्रेजी में कहे तो पैनडेमिक कहा जाए. उदाहरण के लिए के लिए हम SARS वायरस को ले सकते हैं. 2003 में ये दुनिया भर के 26 देशों में फैला था, लेकिन तब भी WHO ने इसे महामारी यानी कि पैनडेमिक नहीं डिक्लेअर किया था. वहीं दूसरी तरफ H1N1, जिसे हम स्वाइन फ्लू के नाम से जानते हैं, 2009 में WHO ने इसे महामारी घोषित किया था. खैर किसी भी बिमारी को  WHO द्वारा  महामारी घोषित करने पर अक्सर लोगों ने सवाल भी उठाए हैं. कई लोगों का मानना है कि इससे लोगों के बीच में डर फैलता है. किसी भी बीमारी को महामारी घोषित करते वक़्त WHO को ये ध्यान रखना होता है कि महामारी घोषित होने के बाद कोई अनावश्यक खौफ या डर की स्थिति पैदा न हो जाए. महामारी घोषित करते समय एक बात और ध्यान रखी जाती है. किसी प्रभावित देश से आने वाले यात्री की वजह से अगर कुछ देशों में छिटपुट मामले सामने आते हैं, तो उसको महामारी घोषित नहीं किया जाता है. जब कई देशों में स्थानीय स्तर पर आपस में लोगों के बीच बीमारी लगातार फैलने लगती है, तब ही उसको महामारी घोषित किया जाता है. जैसा कि कोरोना वायरस को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि इसे महामारी घोषित करने में इतना समय क्यों लगा. तो कोरोना वायरस के साथ भी ऐसा ही हुआ. शुरुआत में स्थानीय स्तर पर बीमारी के फैलने के ज्यादा मामले सामने नहीं आए थे.