मुंबई: टीवी सीरीज 'पेशवा बाजीराव' में मराठा रानी ताराबाई के रूप में नजर आ रहीं जानी-मानी अदाकारा पल्लवी जोशी का कहना है कि जेंडर इक्वलिटी (लैंगिक समानता) को लेकर खुशी का इजहार करने, इस संबंध में विचार किए जाने के बावजूद भारत में अधिकांश महिलाएं अभी भी उन चुनौतियों का सामना कर रही हैं, जिनका सामना सैकड़ों साल पहले महिलाएं किया करती थीं.

ताराबाई भोसले, छत्रपति राजाराम भोसले की पत्नी थीं, जो साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी के छोटे बेटे थे. अपने पति की मौत के बाद ताराबाई ने औरंगजेब के खिलाफ युद्ध की कमान संभाली और मुगलों के खिलाफ विद्रोह जारी रखा.

सोनी पर प्रसारित होने वाले इस ऐतिहासिक शो में अपनी भूमिका की प्रासंगिकता के संबंध में पल्लवी ने बताया, "दुर्भाग्य से 300 साल के बाद भी महिलाओं के लिए कोई बदलाव नहीं आया है. बतौर महिला मैं इस चरित्र से जुड़ाव महसूस कर सकती हूं और इसकी प्रासंगिकता समझ सकती हूं."

अभिनेत्री के मुताबिक, "हालांकि वह (ताराबाई) एक मजबूत महिला थीं, जिन्होंने मराठा शासित प्रदेशों को बचाने के लिए मुगलों के खिलाफ विद्रोह किया, लेकिन मंत्रालय उन्हें एक नेता के तौर पर नहीं देखना चाहती थीं. कारण? क्योंकि वह एक महिला थीं."

पल्लवी कहती हैं कि हालांकि आज हर क्षेत्र में लैंगिक समानता का जश्न मनाया जा रहा है, और वह इस बदलाव को लेकर आशावादी भी हैं, लेकिन बहुसंख्यक अभी भी प्रभावित हैं. वह कहती हैं कि बाहरी आक्रमणकारियों के आने और महिलाओं पर हमला करने से परिस्थितियों में बदलाव आया है. बाल कलाकार के रूप में पल्लवी ने 'आरोहण', 'इम्तिहान' और 'जुस्तजू' जैसे टीवी शो में काम किया है. वह डिजिटल मीडिया के लिए भी कई परियोजनाओं पर काम कर रही हैं.