फिल्ममेकर और एक्टर आरजे बालाजी की सूर्या और तृषा कृष्णन स्टारर फिल्म 'करुप्पु' हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई. रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला, वहीं तृषा कृष्णन के किरदार प्रीति के लिए डबिंग करने वाली सिंगर चिन्मयी श्रीपदा की भी काफी तारीफ हुई. हालांकि, चिन्मयी ने स्वीकार किया कि वो इस बारे में खुलकर बात करने से डर रही थीं.
'करुप्पु' में डबिंग का खुलासा करने से डर रही थीं चिन्मयी श्रीपदा चिन्मयी श्रीपदा ने हाल ही में 'करुप्पु' के लिए डबिंग को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने अपने एक्स पर लिखा, 'ये कहते हुए मुझे अजीब लग रहा है... लेकिन इस बार मैं सच में ये बताने से डर रही थी कि मैंने 'करुप्पु' में डबिंग की है.'
चिन्मयी ने लिखा, 'मैं आरजे बालाजी को काफी समय से जानती हूं. वो और उनकी पत्नी बेहद अच्छे लोग हैं. आरजेबी की जिंदगी मेहनत, संघर्ष और अपने सपनों को सच करने की कहानी है. शायद क्योंकि मैं उन्हें और उनके परिवार को इतनी अच्छी तरह जानती हूं, इसलिए मुझे डर था कि 'लियो' के समय की तरह उन्हें भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है.' उन्होंने लिखा, 'मुझे याद है कि फिल्म के कुछ सीन की डबिंग करते वक्त मैं खूब रोई थी. ये मेरे लिए बहुत बड़ा ट्रिगर था, ऐसा लगा जैसे पास्ट की सारी बातें बड़े पर्दे पर फिर से सामने आ रही हों.'
हालांकि, सिंगर ने तृषा के लिए डबिंग का मौका देने पर आरजे बालाजी का शुक्रिया भी अदा किया. उन्होंने उम्मीद जताते हुए लिखा, 'मुझे उम्मीद है कि करुप्पु सामी मुझे अपने ही एरिये में बिना डर के काम करने की ताकत देंगे और हर वक्त इस डर में नहीं रहना पड़ेगा कि आगे क्या होगा. भगवान मेरी और उन सभी लोगों की मदद करें, जिन्हें सालों से काम करने से रोका गया है.'
चिन्मयी श्रीपदा को तमिल डबिंग यूनियन से किया गया था बाहर बता दें, MeToo आंदोलन के दौरान इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने और डबिंग यूनियन के अध्यक्ष राधा रवि का नाम लेने के बाद साल 2018 में चिन्मयी श्रीपदा को तमिल डबिंग यूनियन से बाहर कर दिया गया था. हालांकि, बाद में विजय स्टारर 'लियो' (2023) के तमिल, तेलुगु और कन्नड़ वर्जन में तृषा कृष्णन के लिए चिन्मयी से डबिंग करवाई थी.
इस फैसले ने चिन्मयी श्रीपदा की वापसी जरूर करवाई, लेकिन इसके साथ ही साउथ इंडियन सिने, टेलीविजन आर्टिस्ट्स एंड डबिंग आर्टिस्ट्स यूनियन (SICTADAU) की ओर से विवाद और विरोध भी शुरू हो गया. यूनियन के सदस्योंने खुले तौर पर इसकी आलोचना की. राजेंद्रन ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया और दावा किया कि लोकेश कनगराज ने चिन्मयी को काम पर रखने के लिए यूनियन को 50 हजार रुपये का जुर्माना भी दिया था.
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