Satluj Controversy: पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ अपनी सिंगिंग के साथ-साथ फैंस का दिल अपनी अदाकारी से भी जीतते रहते हैं. हाल ही में उनकी फिल्म 'सतलुज' ओटीटी पर रिलीज हुई थी. हालांकि दो दिन के भीतर ही इसे ओटीटी से हटा दिया गया है. वैसे आपको बता दें कि ये फिल्म पिछले तीन साल से सेंसर बोर्ड के पास अटकी हुई थी. इसे चुपचाप ओटीटी पर रिलीज किया गया था. आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है? इस पर विवाद आखिर क्यों गहराया हुआ है?

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जसवंत सिंह खालड़ा की बायोपिक है सतलुज

सतलुज जसवंत सिंह खालड़ा की बायोपिक है. बता दें कि वो शिरोमणि अकाली दल के मानवाधिकार प्रकोष्ठ के महासचिव और मानवाधिकार कार्यकर्ता थे. फिल्म में दिलजीत ने जसवंत का ही किरदार निभाया है. सीबीआई के मुताबिक़ 1980 और 1990 के दशक में पुलिस अत्याचार, हिरासत में हुई लोगों की मौतों और कथित फ़र्ज़ी पुलिस मुठभेड़ों की घटनाएं पंजाब में लगातार सुर्खियों में रहती थीं. 

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1984 से 1994 तक जसवंत ने मजीठा, तरनतारन और अमृतसर इन तीन जगहों पर बने शमशान घाटों के अज्ञात शवों का ब्योरा सार्वजनिक किया था और आरोप लगाया था कि ये शव पुलिस की अवैध कार्रवाई का नतीजा है. इसके बाद जसवंत को 6 सितंबर 1995 को अमृतसर में उनके घर से किडनैप कर लिया गया था. इसके बाद वो कभी वापस अपने घर नहीं आए. दावा किया गया कि बाद में उनकी हत्या करके नहर में फेंक दिया गया था.

3 साल से सेंसर बोर्ड में अटकी रही फिल्म

हनी त्रेहान के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में अहम किरदार दिलजीत दोसांझ ने निभाया है. वहीं उनके साथ अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की, जगजीत संधू और गीतिका विद्या ओहल्यान जैसे कलाकार भी हैं. फिल्म करीब तीन साल से सेंसर बोर्ड के पास होल्ड पर थी. पहले इसे 7 फ़रवरी 2025 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज करने का ऐलान किया गया था. लेकिन, इसे सेंसर बोर्ड से हरी झंडी नहीं मिल सकी. मार्च 2025 में बीबीसी पंजाबी से डायरेक्टर हनी त्रेहान ने बात की थी. उन्होंने खुलासा किया था कि सेंसर बोर्ड ने आदेश दिया था कि फिल्म में 21 कट लगाए जाए. हालांकि वक्त बढ़ने के साथ सेंसर बोर्ड की मांग बढ़ी और 120 से ज्यादा कट्स (127) तक लगाने के लिए कह दिया गया. हनी के मुताबिक इतने कट्स लगाने के पीछे कोई कारण भी नहीं था. 

हनी ने कहा था, 'यह जसवंत सिंह खालड़ा की बायोपिक है और मुझसे कहा जा रहा है कि जसवंत सिंह खालड़ा का नाम ही हटा दिया जाए. इसका मतलब तो यह हुआ कि उनका नाम लेना ही अपराध है. ऐसी सभी मांगें मंज़ूर नहीं की जा सकतीं. जिन लोगों को फ़िल्म से कोई आपत्ति है, मैं चाहता हूं कि वे आकर मुझसे बात करें. अगर उनकी कोई वाजिब आपत्ति होगी, तो मैं उसे स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं. मैं एक शांति प्रिय और कानून का पालन करने वाला नागरिक हूं. जिस किसी को भी आपत्ति है, उसके लिए मैं न्यायपालिका में लड़ने को तैयार हूं. लेकिन अगर आप मुझे अदालत ही नहीं जाने देंगे, तो फिर मैं क्या कर सकता हूं?' फिल्म की रिलीज लगातार टलती गई और आखिरकार ये थिएटर्स में रिलीज ही नहीं हो पाई.

विबाद के बीच नाम भी बदला

बता दें कि पहले फिल्म का मूल नाम 'पंजाब 95' रखा गया था. लेकिन जब विवाद बढ़ता गया तो अब इसे मेकर्स ने नया नाम 'सतलुज' दे दिया था. फिल्म में दिखाया गया है कि आतंकवाद के दौर में कैसे 25 हजार से ज्यादा लोगों को पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से मौत के घाट उतार दिया था और यहां तक कि उनका अंतिम संस्कार भी चुपचाप कर दिया गया था. 

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ओटीटी पर 3 जुलाई को चुपचाप हुई रिलीज

सतलुज सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तीन साल से इंतजार कर रही थी. दिलजीत और मेकर्स भी आस लगाए बैठे थे. लेकिन, जब कोई हल नहीं निकला तो मेकर्स ने इसे चुपचाप 3 जुलाई की रात को साढ़े आठ बजे जी5 पर रिलीज कर दिया. फिल्म बिना कट्स और छेड़छाड़ के रिलीज की गई थी. लोगों ने फिल्म देखी और उन्हें ये मूवी काफी पसंद आई. लेकिन, सतलुज 48 घंटों में ही ओटीटी से हटा दी गई.

5 जुलाई को हटा दी गई फिल्म

3 जुलाई की रात को रिलीज हुई फिल्म सतलुज 5 जुलाई को जी5 से हटा दी गई. ज़ी5 ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, 'सतलुज' भले ही थम गई हो, लेकिन उसने जो चर्चा छेड़ी थी, वो अब भी जारी है. आपके अपार प्यार के लिए दिल से धन्यवाद. हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही इसे फिर से आपके बीच लेकर आएंगे.'

सतलुज के हटने के बाद क्या बोले दिलजीत दोसांझ?

सतलुज को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ का भी रिएक्शन सामने आया है. अभिनेता ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, 'इसे जल्दी से देख डालिए.' वहीं अपने फैन पेज द्वारा शेयर किए गए वीडियो में उन्होंने कहा, 'मुझे कोई टेंशन नहीं हैं, मैं तो आराम से बैठा हूं. हटा दी तो हटा दें लोगों ने इसे ऑनलाइन पहले ही डाउनलोड कर लिया है.'