बॉलीवुड में एक बार फिर से मातम पसर गया है. अभी दिग्गज सिंगर आशा भोसले की मौत से फैंस और इंडस्ट्री उबर पाती कि एक और गमगीन खबर सामने आ रही है. फिल्म इंडस्ट्री से अभिनेता भरत कपूर को लेकर जानकारी सामने आ रही है कि उनका निधन हो गया है. उन्होंने 80 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है. एक्टर ने मुंबई के सायन अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली. उनकी मौत की पुष्टि एक्टर अवतार गिल ने की है.
दरअसल, अभिनेता अवतार गिल ने इंडिया टुडे से भरत कपूर के निधन की पुष्टि की है. उन्होंने बात करते हुए बताया, 'मैं अभी अंतिम संस्कार से लौटा हूं, जो शाम 6:30 बजे संपन्न हुआ. उनका निधन आज दोपहर 3 बजे मुंबई के सायन अस्पताल में हुआ था.' अवतार गिल ने भरत कपूर के निधन के पीछे की वजह का खुलासा करते हुए बताया, 'पिछले तीन दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी और उनके कई अंग काम करना बंद कर रहे थे.'
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करीबियों के बीच किया गया अंतिम संस्कारअवतार गिल की जानकारी के अनुसार, अभिनेता भरत कपूर का अंतिम संस्कार काफी सीक्रेट तरीके से किया गया, जिसकी किसी भनक तक नहीं लगी. उनके अंतिम संस्कार में केवल परिवार और करीबियों को ही शामिल किया गया था. आशा भोसले के बाद भरत कपूर का निधन इंडस्ट्री को 15 दिन में दूसरा झटका है. गौरतलब है कि आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल, 2026 को हुआ था. वह 92 साल की थीं. मल्टी ऑर्गेन फेलियर की वजह से उन्होंने अंतिम सांस ली थी.
भरत कपूर का करियरबहरहाल, अगर भरत कपूर के करियर के बारे में बात की जाए तो वो इंडस्ट्री का जाना पहचाना नाम थे. उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया था. उनका 3 दशकों से ज्यादा का फिल्म इंडस्ट्री में करियर रहा. 1970, 80 और 90 के दशकों में वह स्क्रीन पर काफी एक्टिव रहे. फिल्मों में सहायक भूमिका, खलनायक और वकील के किरदार से दर्शकों का दिल जीत लिया था और एक मजबूत पहचान बनाई.
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भरत कपूर की फिल्मेंअगर भरत कपूर की बेहतरीन फिल्मों के बारे में बात करें तो उन्हें 'नूरी' (1979), 'राम बलराम' (1980), 'लव स्टोरी' (1981),'बाजार' (1982), 'गुलामी' (1985), 'आखिरी रास्ता' (1986), 'सत्यमेव जयते' (1987), 'स्वर्ग' (1990), 'खुदा गवाह' (1992), और 'रंग' (1993) जैसी फिल्मों में बेहतरीन काम किया था.
इसके अलावा वह 'बरसात' (1995), 'साजन चले ससुराल' (1996) और बाद में 'मीनाक्षी: ए टेल ऑफ थ्री सिटीज' (2004) जैसी फिल्मों में भी अभिनय किया, जो हिंदी सिनेमा में उनके लंबे समय के योगदान को दर्शाती हैं.
