फिल्म 'A Wednesday' के लिए इन एक्टर्स ने नहीं ली थी फीस
‘अ वेनस्डे’ बनाने का फैसला अचानक नहीं हुआ था. नीरज पांडे और शीतल भाटिया इससे पहले तीन स्क्रिप्ट्स लिख चुके थे, उन स्क्रिप्ट्स पर फिल्म बनाना चाहते थे, लेकिन फंडिंग नहीं थी.

कुछ फिल्मों की शुरुआत बड़े बजट या बड़े स्टार से नहीं, बल्कि पैसों की कमी से होती है. ‘अ वेनस्डे’ (A Wednesday) भी इस तरह की फिल्मों में से एक थी. नीरज पांडे और शीतल भाटिया की पहली फिल्म के तौर पर बनी इस कहानी को आज भी याद किया जाता है. खास बात यह है कि फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर जैसे बड़े कलाकार थे, लेकिन डायरेक्टर्स के पास इतने बड़े स्टार्स को कास्ट करने के लिए पैसे नहीं थे, तो कैसे बनी फिल्म?
पहली स्क्रिप्ट पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने थे. दूसरी फिल्म का बजट लगभग साढ़े 7 करोड़ रुपये था तो तीसरी स्क्रिप्ट के लिए करीब 5 करोड़ रुपये चाहिए थे. उस समय इन प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा जुटाना आसान नहीं था. इसके बाद दोनों ने सोचा कि ऐसी कहानी लिखनी चाहिए, जिसे कम बजट में बनाया जा सके और जिसके लिए फंडिंग भी मिल सके. इसलिए ‘अ वेनस्डे’ की स्क्रिप्ट लिखी गई थी.
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नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर ने नहीं ली फीस
फिल्म के लिए बड़े कलाकारों को जोड़ना भी एक चुनौती हो सकती थी, लेकिन यहां नीरज पांडे और शीतल भाटिया की किस्मत अच्छी रही.
जब वे दोनों नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर से फिल्म को लेकर बात करने पहुंचे तो उन्होंने साफ बताया कि वह पहली फिल्म बना रहे हैं और बजट ज्यादा नहीं है. दोनों कलाकारों ने इस बात को समझा और फिल्म के लिए कोई फीस नहीं लेने का वादा कर दिया. इसके बाद नीरज पांडे और शीतल भाटिया के लिए फिल्म बनाने का रास्ता आसान हो गया.
टीवी से शुरू हुई थी दोनों की कहानी
नीरज पांडे और शीतल भाटिया की मुलाकात फिल्म इंडस्ट्री में नहीं, बल्कि टेलीविजन के दौरान हुई थी. दोनों टीवी प्रोग्रामिंग से जुड़े हुए थे. बाद में जब डेली सोप्स का दौर बढ़ा तो उन्होंने टीवी प्रोग्रामिंग से दूरी बना ली. इसके बाद दोनों ने अपनी फिल्म कंपनी शुरू की और पहली फिल्म बनाई ‘अ वेनस्डे’.
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2008 में रिलीज हुई थी फिल्म
‘अ वेनस्डे’ में नसीरुद्दीन शाह ने एक आम आदमी का रोल निभाया था, वहीं अनुपम खेर पुलिस कमिश्नर की भूमिका में नजर आए थे. इस फिल्म की कहानी आतंकवाद और आम आदमी के गुस्से के आस-पास लिखी गई थी. 5 सितंबर 2008 को रिलीज हुई इस फिल्म ने धीरे-धीरे व्यूर्ज के बीच अपनी खास जगह बनाई. फिल्म को बनाने की शुरुआत भले ही पैसों की कमी से हुई थी, लेकिन आगे चलकर यही कम बजट वाली फिल्म अपनी कहानी की वजह से यादगार बन गई.




















