पंजाबी सिंगर जैस्मीन सैंडलस इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री की बेहतरीन आवाज़ों में शुमार हैं. उन्होंने ‘यार ना मिले’, ‘इलीगल व्यापन’, ‘सिप-सिप’ जैसे कई हिट गाने गाए हैं, जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया है.

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वहीं हाल ही में फिल्म ‘धुरंधर’ और पार्ट 2 में  'वारी जावां', 'ओए ओए', 'आरी आरी', 'शरारत', 'मैं और तू' से वो एक बार फिर छा गईं, इस ट्रैक को भी लोगों का जबरदस्त प्यार मिला. जैस्मिन अक्सर अपने गानों और पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में रहती हैं. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर खुलकर बात की. इस दौरान उन्होंने पिता के निधन के बाद आई मुश्किलों को लेकर कई बाते शेयर की.

जैसमीन सैंडलास का छलका दर्दजैसमीन सैंडलास ने रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट बताया, 'मेरे पापा परिवार के लिए एक 'एंकर' (सहारा) की तरह थे. वह उन बुनियादी चीजों का ख्याल रखते थे जिनकी आप एक पिता और पति से उम्मीद करते हैं. वह बहुत ज्यादा दखल नहीं देते थे, लेकिन उनके जाने के बाद हम सब बिखर गए. उन्हें गुजरे 10 साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन हम आज भी उन टुकड़ों को समेटने की कोशिश कर रहे हैं.'

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सिंगर मे बताया, 'पापा के बिना चीजें बहुत मुश्किल हो गईं. मैं उन्हें आज भी बहुत याद करती हूं, क्योंकि मैं अपनी कामयाबी की खुशियां उनके साथ मनाना चाहती हूं. मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि देखिए, 'बीरा' (भाई) का म्यूजिक करियर कितना शानदार चल रहा है और मैं भी बहुत अच्छा कर रही हूं. अब मैं उनसे सिर्फ अपने सपनों में ही बात कर पाती हूं.'

जैसमीन सैंडलास  ने झेला बुरा दौरजैसमीन ने कहना था, 'पापा को खोना और प्यार में दिल टूटना बहुत मुश्किल था. मैंने जिंदगी में कई बार 'रॉक बॉटम' (जब इंसान पूरी तरह टूट जाता है) देखा है. कुछ दुनिया ने देखा, कुछ नहीं. लेकिन मैंने कभी भगवान पर से भरोसा नहीं खोया. मेरे पास कुछ 'फरिश्ते' थे- मेरी फैमिली और कुछ दोस्त, जिन्होंने मुझे संभाला. सबसे बड़ी लड़ाई दुनिया से नहीं, बल्कि खुद की असुरक्षाओं खुद के शक और कमजोरियों से थी. दुनिया को जीतना तो आसान है, खुद से जीतना ही असली चुनौती थी. एक वक्त ऐसा भी था जब मैं लगभग हार मान चुकी थी.'

म्यूजिक जर्नी और देर से मिली सफलताउन्होंने कहा, 'संगीत का मेरा सफर बहुत उतार-चढ़ाव भरा रहा. मुझे सफलता बहुत देर से मिली. कई बार मुझे लगा कि शायद यह मेरे लिए नहीं है, शायद मेरे माता-पिता सही कह रहे हैं कि मुझे इसे सिर्फ एक शौक तक सीमित रखना चाहिए. लेकिन पता नहीं कैसे, जिंदगी हमेशा एक नया मोड़ ले लेती थी. जब भी मैं उम्मीद खोती, कोई नया गाना आ जाता या कोई नया मौका मिल जाता. मुझे लगता है कि भगवान इसी तरह हमसे बात करते हैं किसी गाने या किसी मौके के जरिए वह मुझे रास्ता दिखाते रहे और मैं चलती रही.'

जब मां ने कहा- 'तुम शिव कुमार बटालवी नहीं बन सकती'उन्होंने आगे कहा, 'इसी संघर्ष के दौरान मैंने लिखना शुरू किया. घर पर मम्मी हमेशा कहती थीं कि तुम्हें किसी 'असली' लेखक से गाने लिखवाने चाहिए. बच्चों के दिमाग में मां-बाप की आवाज हमेशा गूंजती है, वे उसे ही अपनी हकीकत मान लेते हैं. मुझे भी लगने लगा कि क्या मैं वाकई लिख सकती हूं?'

उन्होंने एक किस्सा बताते हुए कहा, 'एक बार मैं कैलिफोर्निया में मम्मी के साथ कॉफी पीने जा रही थी. मैंने उनसे शिव कुमार बटालवी और पाश (मशहूर पंजाबी कवि) की बात की, तो मम्मी ने कहा- 'तू शिव या पाश नहीं बन सकती.' एक कलाकार के तौर पर यह बात मुझे चुभ गई. मैंने गाड़ी साइड में लगाई और अपने दिल को तसल्ली देने के लिए खुद के लिए कुछ पंक्तियां लिखीं: 'तू शिव या पाश भी बनता है, तू आम से खास भी बनता है, किसी की आस भी बनता है...'

मैंने खुद को ही लिखकर खुश किया. मैंने हजारों गाने लिखे हैं. शायद मैं बूढ़ी हो जाऊंगी लेकिन ये गाने खत्म नहीं होंगे. आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं, तो जैस्मीन की ये जर्नी और इंडियन म्यूजिक में उसका मुकाम एक बहुत बड़ी बात लगती है.'