बॉलीवुड में कुछ कलाकार लीड रोल के बिना भी अपने सपोर्टिंग रोल से लोगों के दिलों में खास जगह बना लेते है. ऐसी ही एक एक्ट्रेस थीं शम्मी, जिन्हें उनके चाहने वाले आज भी 'शम्मी आंटी' कहकर बुलाते है. उन्होंने अपनी सादगी, मुस्कान और कॉमिक टाइमिंग से हर घर में पहचान बनाई. आइए आज 24 अप्रैल को उनका जयंती है, तो आइए उनके नाम से जुड़ा एक किस्सा जानते हैं.
कैसे बदला नरगिस रबादी का नाम?
बहुत कम लोग जानते हैं कि शम्मी आंटी का असली नाम 'नरगिस रबादी' था. जब उन्होंने 18 साल की उम्र में इंडस्ट्री में कदम रखा था, तो वो 'नरगिस' नाम से ही पहचानी जाती थीं. लेकिन जब 1949 में उन्हें 'उस्ताद पेड्रो' में काम करने का मौका मिला, तो उस समय नरगिस दत्त पहले से ही बड़ी एक्ट्रेस थी. ऐसे में नाम को लेकर कन्फ्यूजन न हो, इसलिए फिल्म के निर्माता शेख मुख्तार ने नरगिस रबादी से अपना नाम बदलने को कहा. यहीं से उनका नया नाम 'शम्मी' रखा गया, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया.
शम्मी की यादगार फिल्में और सीरियल
शुरुआत में शम्मी ने लीड रोल निभाए और फिल्म 'मल्हार' से उन्हें अच्छी पहचान मिली. उन्होंने 'दिल अपना और प्रीत पराई', 'हाफ टिकट', 'द ट्रेन', 'कुदरत' और 'हम साथ-साथ हैं' जैसी कई फिल्मों में शानदार अभिनय किया था. इसके बाद 90 और 2000 से दशक में 'कुली नंबर 1', 'हम', 'गुरुदेव' और 'गोपी किशन' जैसी फिल्मों में दिखीं. 2013 में बोमन ईरानी के साथ उन्होंने 'शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी' में भी काम किया. इसके अलावा, टीवी पर भी उन्होंने 'देख भाई देख', 'जबान संभाल के', 'कभी ये कभी वो' और 'श्रीमान श्रीमती' जैसे शो में अपनी छाप छोड़ी.
7 साल में ही टूट गया था रिश्ता
बता दें कि शम्मी का जन्म 24 अप्रैल 1929 को मुंबई में एक पारसी परिवार में हुआ था. 3 साल की उम्र में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया था, जिसके बाद उनकी मां ने धार्मिक सभाओं में खाना बनाकर परिवार को संभाला. पढ़ाई के बाद उन्होंने नौकरी भी की, लेकिन किस्मत उन्हें फिल्मों तक ले आई. उन्होंने 30 की उम्र में निर्माता सुल्तान अहमद से शादी की, जो ज्यादा समय तक नहीं चल पाई और 7 साल बाद दोनों अलग हो गए. उनकी बड़ी बहन मणि रबादी एक फैशन डिजाइनर थी. शम्मी आंटी ने अपने करियर में 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और 6 मार्च 2018 को 88 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया और उनके कोई बच्चे नहीं है.
