शबाना आजमी ने ‘दूसरी दुल्हन’ को लेकर किया रिएक्ट, लिखा- अपने समय से आगे थी फिल्म
शबाना आजमी ने 1983 की फिल्म 'दूसरी दुल्हन' को याद किया. उन्होंने कहा कि ये अपने समय से काफी आगे की सोच वाली और प्रगतिशील फिल्म थी.

एक्ट्रेस शबाना आजमी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर फिल्मों से जुड़ी यादों को शेयर करती रहती हैं. मंगलवार को उन्होंने 1983 की चर्चित फिल्म 'दूसरी दुल्हन' को याद करते हुए एक पोस्ट शेयर की.
'दूसरी दुल्हन' समय से आगे थी फिल्म
शबाना ने फिल्म में निभाए गए अपने किरदार का छोटा-सा वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया. पोस्ट के जरिए उन्होंने फिल्म की महत्ता पर जोर देते हुए बताया कि यह फिल्म अपने दौर के हिसाब से काफी आधुनिक और प्रगतिशील थी. उन्होंने पोस्ट में फिल्म के निर्देशक लेख टंडन का भी आभार व्यक्त किया.
एक्ट्रेस ने लिखा, ‘लेख टंडन की फिल्म 'दूसरी दुल्हन' अपने समय से काफी आगे की सोच वाली फिल्म थी और इसमें निभाया गया मेरा किरदार मुझे बहुत पसंद था.’ 1983 में रिलीज हुई हिंदी ड्रामा फिल्म 'दूसरी दुल्हन' का निर्देशन लेख टंडन ने किया था. फिल्म में शबाना आजमी, शर्मिला टैगोर, विक्टर बनर्जी और रणधीर कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे.
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शबाना आजमी ने एक वेश्या चंदा की मुख्य भूमिका निभाई थी. सरोगेसी जैसे अनूठे विषय पर बनी इस फिल्म में एक निस्संतान दंपत्ति (शर्मिला टैगोर और विक्टर बनर्जी) संतान प्राप्ति के लिए शबाना आजमी को सरोगेट मदर के रूप में चुनते हैं, जिसके बाद कहानी में कई भावनात्मक मोड़ आते हैं.
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फिल्म की कहानी में एक दंपत्ति रेनू (शर्मिला टैगोर) और अनिल (विक्टर बनर्जी) मिसकैरेज के बाद बच्चा पैदा करने में असमर्थ होते हैं. वे चंदा (शबाना आजमी) को अपने बच्चे की सरोगेट मां बनने के लिए मनाते हैं, जो घर में 'दूसरी दुल्हन' की तरह आती है.
इस फिल्म की शूटिंग मुख्य रूप से मसूरी में की गई थी और इसका संगीत बप्पी लाहिड़ी ने तैयार किया था. यह फिल्म 1980 के दशक की उन फिल्मों में से है, जिसने सरोगेसी और वेश्यावृत्ति के मुद्दे को सामाजिक दृष्टिकोण से पेश किया था. हालांकि, बाद में फिल्म की तुलना 2001 में आई सलमान खान, रानी मुखर्जी और प्रीति जिंटा की फिल्म 'चोरी चोरी चुपके चुपके' से की जाती है क्योंकि दोनों का मूल विषय एक ही था.

























