फिल्म इंडस्ट्री के वर्सेटाइलएक्टर का नाम लें तो रणदीपहुड्डा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. रणदीप न केवल अपनी शानदार एक्टिंगस्किल बल्कि किरदारों के लिए किए बॉडीट्रांसफॉर्मेशन के लिए भी जाने जाते हैं. रणदीप के इस पैशन ने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दी है.
चाहे वह ‘सरबजीत’ में कमजोर और प्रताड़ित किरदार हो या ‘जाट’ में खतरनाक खलनायक की भूमिका हो, रणदीप ने बॉडीट्रांसफॉर्मेशन और बदलते अंदाज से दर्शकों को बार-बार चौंकाया है.उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी उतनी ही रोचक है जितने उनके किरदार.
कितने पढ़े-लिखे है रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda Education)20 अगस्त 1976 को हरियाणा के रोहतक में जन्मे रणदीप ने स्कूली शिक्षा मोतीलाल नेहरू स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स (एमएनएसएस), राई, हरियाणा के एक बोर्डिंग स्कूल से की, जहाँ उन्होंने तैराकी और घुड़सवारी के खेलों में भाग लिया और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते. अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, हुड्डा 1995 में मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया से ह्यूमनरिसोर्समैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली. विदेश में खर्चापानी निकालने के लिए रणदीप ने वहां के रेस्तरां में काम किए और कार वॉश और टैक्सीड्राइविंग जैसे काम भी किए.
फिल्मी दुनिया में एंट्रीभारत वापस लौटकर उन्होंने मॉडलिंग और थिएटर शुरू किया. साल 2001 में उन्हें बड़ा मौका मिला. उन्होंने मीरा नायर की ‘मॉनसूनवेडिंग’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया. ‘वन्सअपॉन अ टाइम इन मुंबई’ (2010) ने उन्हें स्टार बना दिया. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक से बढ़कर एक शानदार फिल्मों में काम किया. नसीरुद्दीन शाह के 'मोटलीथिएटर ग्रुप' से रंगमंच पर उतरे. फिल्मइंडस्ट्री के ‘रणतुंगा’ के पांच दमदार किरदारों पर नजर डालें तो इसी साल आई 'जाट' में उनके 'रणतुंगा' के किरदार को दर्शकों से खूब प्यार मिला.
किरदारों के लिए बदला अंदाजफिल्मी किरदारों को असली रूप देने के लिए रणदीप ने कई बार हैरान कर देने वाले ट्रांसफॉर्मेशन किए.
जाट (2024): 'जाट' में खलनायक रणतुंगा के लिए रणदीप ने 8 किलो वजन बढ़ाया और बाल लंबे किए थे. इस किरदार के लिए उन्हें आवाज भी भारी करनी पड़ी थी. एक इंटरव्यू में रणदीपहुड्डा ने बताया था कि किरदार के लिए उन्होंने बाल बढ़ाए और अपनी बॉडी पर काम किया ताकि रणतुंगा का किरदार ज्यादा खतरनाक दिख सके.
स्वतंत्र वीर सावरकर (2024): स्वतंत्र वीर सावरकर' साल 2024 में रिलीज हुई थी, जो उनकी बतौर निर्देशक डेब्यू फिल्म रही. रणदीप ने विनायक दामोदर सावरकर के लिए 26 किलो वजन घटाया था. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया- 'मैं डेढ़ साल तक बेहद कमजोर रहा. इतना कमजोर था कि घोड़े से गिर गया, मेरा पैर मुड़ गया. कुछ भी हो सकता था. बहन डॉ. अंजलि हुड्डा ने मेरी सेहत का ध्यान रखा. फिल्म निर्माता आनंद पंडित ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि इस रोल के लिए उन्होंने 18 दिनों में 26 किलो वजन कम किया था. संदीप ने बताया कि जब वह ऑफिस आए थे तब उनका वजन 86 किलो था. वह किरदार में इस कदर डूबे कि 18 दिनों में 26 किलो वजन कम कर लिया. रणदीप ने चार महीनों तक केवल 1 खजूर और 1 गिलास दूध पीकर अपना वजन कम किया था.
घरवालों की फिक्र और बहन का साथरणदीप की बहन अंजलि हुड्डा ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता सर्जन हैं और भाई के ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर वो काफी नाराज थे और मां रोने लगी थीं. अंजलि ने बताया- 'मेरे पिता ने मुझसे कहा था कि रणदीप को प्रोत्साहित न करूं. वहीं, मां रणदीप का वजन कम होते देख चिंतित थीं. वह कहती थी कि मैं नहीं देख सकती इसे, हड्डियों का ढांचा बन गया है. रणदीप ने कहा था- 'हर बार माता-पिता मुझसे वादा लेते हैं कि मैं दोबारा ऐसा नहीं करूंगा, लेकिन किरदार का जुनून मुझे फिर खींच लेता है.' रणदीप की की बहन अंजलि ने बताया था- 'मैं ऐसे वजन घटाने के खिलाफ हूं, लेकिन उनकी कला के लिए डेडिकेशन के कारण मैंने उनकी मदद की.'
कई बार ट्रांसफोर्मेशन से चौंकायारणदीप की साल 2016 में फिल्म आई थी 'दो लफ्जों की कहानी,' जिसमें वह एमएमएफाइटर सूरज चौहान के किरदार में थे. इस किरदार के लिए उन्होंने मसल्स बनाए थे. 'दो लफ्जों की कहानी' के लिए 77 किलोग्राम से 94 किलोग्राम तक वजन भी बढ़ाया था. साल 2016 में आई 'सरबजीत' में उन्होंने टाइटलरोल निभाया था. इसके लिए रणदीप ने 20 किलोग्राम वजन कम किया था. एक इंटरव्यू के में उन्होंने कहा था- 'मैं भुखमरी और कैद का अनुभव करना चाहता था. इसके लिए मेहनत करना जरूरी था. मैंने अपना 100 प्रतिशत दिया.'
