निर्देशक प्रियदर्शन ने हाल ही में अभिनेता राजपाल यादव का खुलकर समर्थन किया है, जो इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. राजपाल यादव के ऊपर एक पुराने चेक बाउंस और कर्ज से जुड़े मामले में ये कानूनी कार्रवाई की गई है. ये मामला उनकी निर्देशित फिल्म 'अता पता लापता' (2010) से जुड़ा है. फिल्म के निर्माण के लिए उन्होंने पैसे उधार लिये था, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और कर्ज समय पर भुगतान न होने के कारण मामला अदालत तक पहुंच गया.

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दोस्ती या रणनीति? राजपाल यादव की मुसीबत में प्रियदर्शन का बड़ा कदम आखिर क्यों?

प्रियदर्शन ने बताया कि वे राजपाल यादव को पिछले लगभग 20 वर्षों से जानते हैं और उन्होंने कई फिल्मों में साथ काम किया है. उनके अनुसार, राजपाल एक मेहनती और अच्छे दिल के इंसान हैं, लेकिन कम शिक्षा और कानूनी जानकारी की कमी के कारण उन्होंने एक बड़ी गलती कर दी, जिसकी वजह से आज उन्हें ये स्थिति झेलनी पड़ रही है. सबसे खास बात ये रही कि प्रियदर्शन ने अपनी अगली फिल्म के निर्माताओं से राजपाल यादव की फीस बढ़ाने की मांग की. उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक और कानूनी मुश्किलों को देखते हुए राजपाल को अधिक भुगतान मिलना चाहिए.

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कर्ज और एक ‘बड़ी गलती’: आखिर क्यों बढ़ाई प्रियदर्शन ने राजपाल यादव की फीस?

ये पूरा घटनाक्रम सिर्फ एक कानूनी विवाद की कहानी नहीं, बल्कि दोस्ती, जिम्मेदारी और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने की मिसाल भी है. राजपाल यादव की स्थिति ये दिखाती है कि फिल्म इंडस्ट्री में असफलता कभी-कभी कितनी भारी पड़ सकती है, खासकर जब आर्थिक जोखिम बड़ा हो. एक फिल्म की नाकामी ने उन्हें कर्ज और कानूनी परेशानियों में डाल दिया, जिसका परिणाम आज तिहाड़ जेल तक पहुंच गया है. दूसरी ओर, प्रियदर्शन का समर्थन ये दिखाता है कि रिश्ते केवल काम तक सीमित नहीं होते. उन्होंने न सिर्फ सार्वजनिक रूप से राजपाल यादव का बचाव किया, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम भी उठाया. अपनी अगली फिल्म में उनकी फीस बढ़वाने की पहल ये साबित करती है कि वे सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि कर्म से भी साथ दे रहे हैं. ये घटना ये भी सिखाती है कि आर्थिक और कानूनी फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए, क्योंकि छोटी सी चूक लंबे समय तक असर डाल सकती है.