राजेश रोशन ने कभी नहीं सोचा था कि आगे चलकर उनकी पहचान संगीत की दुनिया में बनेगी. उनका सपना तो एक सरकारी नौकरी करने का था और उसी रास्ते पर बढ़ने की सोच भी थी. लेकिन वक्त ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था. घर का माहौल, मां का साथ और संगीत से धीरे-धीरे बढ़ता जुड़ाव उन्हें उस राह पर ले आया, जहां से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज उनके नाम कई यादगार गाने दर्ज हैं. आइए जानते हैं कैसे राजेश रोशन के लिए संगीत सिर्फ शौक नहीं रहा, बल्कि उनकी जिंदगी और पहचान दोनों बन गया.

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हिंदी सिनेमा में जब भी मधुर संगीत और यादगार गीतों की बात होती है, तो राजेश रोशन का नाम जरूर लिया जाता है. उन्होंने अपने संगीत से फिल्मों को खास बनाया. साथ ही कई कलाकारों के करियर में भी अहम भूमिका निभाई. बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन को पहली बार फिल्म में गाना गाने का मौका भी राजेश रोशन ने ही दिया था. पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने रोमांटिक गानों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई.

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मुंबई में हुआ जन्म, परिवार से मिला संगीत का साथ

राजेश रोशन का जन्म 24 मई 1955 को मुंबई में हुआ था. उनका पूरा नाम राजेश रोशनलाल नागरथ है. वो मशहूर संगीतकार रोशनलाल नागरथ के बेटे हैं. उनके बड़े भाई राकेश रोशन हिंदी सिनेमा के सफल एक्टर, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर हैं, जबकि ऋतिक रोशन उनके भतीजे हैं. राजेश रोशन जब केवल 12 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था. पिता के जाने के बाद परिवार पर मुश्किल समय आया, लेकिन उनकी मां इरा रोशन ने बच्चों को संभाला और संगीत से उनका रिश्ता बनाए रखा.

सरकारी नौकरी का सपना था, फिर संगीत की तरफ बढ़े कदम

शुरुआत में राजेश रोशन का सपना संगीतकार बनने का नहीं था. वो सरकारी नौकरी करना चाहते थे लेकिन उनकी मां संगीत सीखने के लिए उस्ताद फैयाज अहमद खान के पास जाया करती थीं और राजेश भी उनके साथ जाते थे. धीरे-धीरे संगीत में उनकी रुचि बढ़ने लगी. बाद में उन्होंने संगीत की शिक्षा गंभीरता से ली और मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ सहायक के तौर पर काम करना शुरू किया. करीब पांच साल तक उनके साथ काम करके राजेश रोशन ने संगीत की बारीकियां सीखीं.

'जूली' से मिली पहचान, फिर दिए कई हिट गाने

बतौर संगीतकार राजेश रोशन ने अपने करियर की शुरुआत साल 1974 में फिल्म 'कुंवारा बाप' से की. इस फिल्म का गाना 'सज रही गली' काफी पसंद किया गया. हालांकि उन्हें असली पहचान 1975 में रिलीज हुई फिल्म 'जूली' से मिली. इस फिल्म के गाने 'दिल क्या करे', 'ये रातें नई पुरानी' और 'माई हार्ट इज बीटिंग' आज भी लोगों की जुबान पर हैं. इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर अवॉर्ड भी मिला. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

इन फिल्मों का संगीत आज भी लोगों को याद

राजेश रोशन ने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्मों में संगीत दिया. 'देश परदेस', 'मिस्टर नटवरलाल', 'काला पत्थर', 'कामचोर', 'करण अर्जुन', 'कहो ना... प्यार है', 'कोई... मिल गया' और 'कृष' जैसी फिल्मों में उनका सॉन्ग बहुत पॉपुलर हुआ. उनके गानों को हर उम्र के लोग पसंद करते थे.

कैसे अमिताभ बच्चन को पहली बार गाने का मौका दिया?

राजेश रोशन से जुड़ा सबसे दिलचस्प किस्सा अमिताभ बच्चन से जुड़ा है. साल 1979 में फिल्म 'मिस्टर नटवरलाल' बन रही थी. उसी दौरान राजेश रोशन ने अमिताभ बच्चन से एक गाना गाने की बात कही. अमिताभ ने इससे पहले कभी फिल्मों में गाना नहीं गाया था. राजेश रोशन ने उनसे 'मेरे पास आओ मेरे दोस्तों' गवाया. ये गाना बच्चों और बड़ों के बीच बहुत पॉपुलर हुआ. इसके बाद अमिताभ बच्चन ने कई फिल्मों में अपनी आवाज दी, लेकिन उनके फिल्मी सिंगिंग की शुरुआत राजेश रोशन की वजह से ही हुई थी.

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दो फिल्मफेयर अवॉर्ड और कई यादगार गाने

राजेश रोशन ने अपने लंबे करियर में दो बार फिल्मफेयर बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर अवॉर्ड जीता. पहला अवॉर्ड उन्हें 'जूली' के लिए मिला और दूसरा 'कहो ना... प्यार है' के लिए. इस फिल्म ने उनके भतीजे ऋतिक रोशन को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया था. राजेश रोशन ने करीब 125 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया और बॉलीवुड को अनगिनत यादगार गीत दिए.