हिंदी सिनेमा में बहुत कम ही ऐसे एक्टर हुए हैं जिन्होंने असली मायनों में स्टारडम का स्वाद चखा हो. ऐसे ही अभिनेता थे राजेश खन्ना जिन्होंने सिर्फ हिट फिल्में ही नहीं दीं बल्कि लोगों के दिलों पर भी राज किया. उनकी एक झलक पाने के लिए फैंस सारी हदें पार कर जाते थे. उनके लिए दीवानगी इस कदर थी कि लड़कियां उनके नाम का सिंदूर लगाती थीं और कुछ तो उनकी फोटो के साथ सात फेरे तक ले लेती थीं.

‘ऊपर आका, नीचे काका’ की गूंज हर तरफराजेश खन्ना के नाम से जुड़ी कहावत भी खूब मशहूर हुई थी ‘ऊपर आका, नीचे काका’. उनका स्टारडम ऐसा था कि शूटिंग लोकेशन के बाहर भिखारी भी उनके नाम पर भीख मांगते थे. ये उस दौर की बात है जब एक्टर नहीं बल्कि उनका नाम ही लोगों को खींच लाता था.

अमृतसर से सुपरस्टार बनने तक का सफरपंजाब के अमृतसर में जन्मे राजेश खन्ना का स्टारडम किसी से छिपा नहीं था. उन्होंने सिर्फ 3 साल में 17 हिट फिल्में दी थीं. डायरेक्टर और प्रोड्यूसर अपनी स्क्रिप्ट लेकर उनके घर के नीचे लाइन लगाकर खड़े रहते थे. हालांकि हर किसी की किस्मत नहीं खुलती थी क्योंकि काका बहुत कम स्क्रिप्ट्स पर ही हामी भरते थे.

दीवानगी से परेशान हो गया था सुपरस्टारएक्टर फ्लॉप फिल्मों से परेशान होते थे लेकिन राजेश खन्ना इकलौते ऐसे अभिनेता थे. जो अपनी बढ़ती पॉपुलैरिटी और दीवानगी से भी परेशान हो गए थे. एक वक्त ऐसा भी आया जब वो खुद चाहते थे कि उनकी कुछ फिल्में फ्लॉप हो जाएं ताकि ये दीवानगी थोड़ी कम हो सके.

जब वक्त ने करवट लीकहते हैं ना, वक्त कभी एक सा नहीं रहता. रात के बाद दिन और दिन के बाद रात जरूर आती है. यही बात काका के साथ भी हुई. साल 1976-77 में उनकी फिल्में लगातार फ्लॉप होने लगीं. सिनेमाघर खाली रहने लगे और फिल्में अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रही थीं.

फ्लॉप फिल्मों ने बढ़ाया दर्दयासिर उस्मान की किताब “द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियाज फर्स्ट सुपरस्टार” में बताया गया है कि लगातार फ्लॉप फिल्मों की वजह से राजेश खन्ना डिप्रेशन में चले गए थे. अपने दुख को भूलने के लिए वो ड्रिंक करने लगे थे.

अंधेरे में डूबता मनहालात इतने बिगड़ गए थे कि राजेश खन्ना रात में अचानक चीखने लगते थे. उनके मन में आत्महत्या के ख्याल आने लगे थे. किताब के मुताबिक वो समंदर में डूबकर अपनी जान देने तक के बारे में सोचने लगे थे. 1976 और 1977 का दौर उनके जीवन का सबसे मुश्किल समय माना जाता है.

‘महबूबा’ और करियर की बड़ी आपदासाल 1976 में हेमा मालिनी के साथ आई फिल्म ‘महबूबा’ सुपर फ्लॉप साबित हुई. इस फिल्म को उनके करियर की बड़ी आपदा कहा गया. उसी समय अमिताभ बच्चन का ‘एंग्री यंग मैन’ वाला दौर शुरू हो चुका था और लोगों की पसंद बदलने लगी थी.

जब पॉपुलैरिटी किसी और की हो गई1971 की फिल्म ‘आनंद’ में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन दोनों नजर आए थे. लेकिन सारी पॉपुलैरिटी अमिताभ बच्चन को मिल गई. इसके बाद 1976 में ‘बंडल बाज’ और 1977 में ‘अनुरोध,’ ‘त्याग,’ ‘कर्म,’ ‘छैला बाबू’ और ‘चलता पुर्जा’ जैसी फिल्में रिलीज हुईं.

बैक-टू-बैक फ्लॉप और बदलता दौरराजेश खन्ना की लगातार पांच फिल्में फ्लॉप हो गई थीं. धीरे-धीरे उन्हें फिल्में मिलना कम होने लगा क्योंकि तब तक अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र युवाओं की नई पसंद बन चुके थे. काका का चमकता सितारा अब धीरे-धीरे फीका पड़ने लगा था.