फिल्म नहीं, इस नाटक ने बदली थी पंकज त्रिपाठी की जिंदगी, राजनीति के चक्कर में गए थे जेल
हिंदी सिनेमा के दमदार अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने संघर्ष से सफलता तक का मुकाम छुआ है. अपने संजीदा अभिनय से पंकज त्रिपाठी सीधे दर्शकों के दिलों में उतर जाते हैं.

हिंदी सिनेमा में कई कलाकार ऐसे हुए हैं जिन्होंने साइड और सपोर्टिंग रोल करके फैंस का दिल जीता है. इस फेहरिस्त में कई मशहूर नाम शामिल हैं. हालांकि आज के दौर में इस तरह के एक्टर का नाम लिया जाए तो जेहन में सबसे पहला नाम पंकज त्रिपाठी का आता है. उनका बचपन गरीबी में बीता और जवानी के दिनों में भी उन्होंने काफी संघर्ष किया. हालांकि अपने दमदार अभिनय से वो अब हर किसी के दिल पर राज करते हैं.
शुरू से उन्हें अभिनय का शौक नहीं रहा है. उनके पिता चाहते थे कि वो पढ़-लिखकर डॉक्टर बने और लोगों की सेवा करें. जबकि पंकज का रुझान एक वक्त राजनीति में हो गया था. कॉलेज के दिनों में वो स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स में सक्रिय थे. आइए आज उनके जन्मदिन के मौके पर एक नजर डालते हैं उनकी लाइफ पर. ये मशहूर अभिनेता आज अपना 50वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं.
बिहार के गांव में हुआ था जन्म
पंकज त्रिपाठी का जन्म 5 सितंबर 1976 को बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव में हुआ था. वो आज अपने जीवन के पांच दशक पूरे कर चुके हैं. एक्टर का असली सरनेम तिवारी है, हालांकि 10वीं क्लास के दौरान उन्होंने अपना सरनेम तिवारी से त्रिपाठी कर लिया था.

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पिता चाहते थे डॉक्टर बने बेटा
पंकज त्रिपाठी के पिता उन्हें डॉक्टर बनते हुए देखना चाहते थे. ऐसे में अभिनेता ने भी पिता की बात का मान रखते हुए इस फील्ड की ओर कदम बढ़ा दिए थे. मीडिया हाउस से बातचीत में अभिनेता ने बताया था कि वो डॉक्टर की पढ़ाई के लिए पटना आ गए थे.
राजनीति के चक्कर में गए थे जेल
पंकज ने आगे बताया था कि डॉक्टर की पढ़ाई के दौरान उनका मन नहीं लगा तो वो स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स में आ गए. कॉलेज के दिनों में अभिनेता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की तरफ से छात्र राजनीति में थे. उन्होंने बताया था कि उन दिनों उनके मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा थी. एक्टर को इस दौरान विद्यार्थी परिषद में रहते हुए जेल की हवा भी खानी पड़ी थी.
'अंधा कुआं' नाटक के कारण एक्टिंग फील्ड में आए
डॉक्टर की पढ़ाई में मन ना लगने के बाद पंकज का मन छात्र राजनीति से भी उठने लगा. इसके बाद उन्होंने एक्टिंग फील्ड में आने का फैसला लिया था. हालांकि उनके इस फील्ड में आने के पीछे एक किस्सा रहा है. दरअसल एक बार वो अपने एक दोस्त के साथ 'अंधा कुआं' नाम का नाटक देखने के लिए गए थे और इसके बाद अभिनेता ने मन बना लिया था कि अब उन्हें एक्टिंग ही करना है.

6 साल तक पटना में किया थिएटर, 2004 में आए मुंबई
पटना में रहते हुए पंकज ने एक के बाद एक थिएटर में काम करते हुए कई नाटक किए. उनका काम लगों को पसंद आने लगा था और धीरे-धीरे पंकज भी इसमें उतरते चले गए. एक्टर ने 1995 से 2001 तक पटना में नाटक किए. इसके बाद वो फिल्मों की दुनिया में काम करने का सपना लिए साल 2004 में मुंबई आ गए थे.
काम के लिए दर-दर भटके, पत्नी चलाती थीं घर
मुंबई आने के बाद पंकज को काम पाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा था. उस मुश्किल दौर में उनकी पत्नी मृदुला त्रिपाठी उनका घर चलाती थीं. पंकज ने बताया था कि साल 2004 से 2010 के बीच मैंने कुछ नहीं कमाया. मैं अंधेरी में घूमता रहता था और लोगों से कहा करता था कि कोई मुझसे एक्टिंग करवा लो.

'गैंग्स ऑफ वासेपुर' ने बदले दिन
पंकज ने अमिताभ बच्चन और भूमिका चावला की साल 2004 की फिल्म 'रन' में एक छोटा सा रोल किया था. एक्टर को पहला बड़ा ब्रेक और पहली बड़ी पहचान साल 2012 की बेहतरीन फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से मिली थी. इसमें उन्होंने सुल्तान कुरैशी नाम के किरदार से फैंस का दिल जीता था. इस फिल्म ने बाकी स्टार्स नवाजुद्दीन सिद्दीकी, ऋचा चड्ढा और हुमा कुरैशी को भी पहचान दिलाई थी.

'मिर्जापुर' से ओटीटी पर भी छाए
पंकज ने 'मसान', 'न्यूटन', 'बरेली की बर्फी', 'ओएमजी 2' और 'मिमी' जैसी फिल्मों से भी पहचना बनाई है. साल 2018 में उन्होंने 'मिर्जापुर' वेब सीरीज से ओटीटी डेब्यू किया था और डेब्यू करते ही हर किसी की जुबान पर उनका नाम था. कालीन भैया के किरदार से उन्हें बड़ी पहचान नसीब हुई. इसके हर सीजन से वो फैंस के बीच छाए रहे. फिर उन्होंने 'क्रिमिनल जस्टिस' और 'सेक्रेड गेम्स' में भी अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा.
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