नई दिल्ली: दक्षिण एशिया के दिग्गज अभिनेता पद्मश्री ओम पुरी ने आज दुनिया को अचानक अलविदा कह दिया. शुक्रवार की सुबह दिल के दौरे ने उन्हें हम से छीन लिया.
66 साल के ओम हिंदी सिनेमा जगत के साथ-साथ कई हॉलीवुड फिल्मों का भी हिस्सा रहे हैं. उनकी गिनती समानांतर सिनेमा से लेकर व्यावसायिक सिनेमा तक है. दोनों में ही उन्होंने सफलता हासिल की है. उनके निधन की खबर से प्रशंसकों में शोक है.
ओम पुरी का जन्म अंबाला के एक पंजाबी परिवार में 18 अक्टूबर, 1950 को हरियाणा के अंबाला शहर में हुआ. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ननिहाल पंजाब के पटियाला से पूरी की. वर्ष 1993 में ओम पुरी ने नंदिता पुरी के साथ शादी की थी. 2013 में उनका तलाक हो गया था. उनका एक बेटा ईशान हैं.
वर्ष 1976 में पुणे फिल्म संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ओम पुरी ने लगभग डेढ़ वर्ष तक एक स्टूडियो में जिज्ञासुओं को अभिनय के गुर सिखाए. इसके बाद उन्होंने ने अपने निजी थिएटर ग्रुप 'मजमा' की स्थापना की.
ओम ने बॉलीवुड के अलावा ब्रिटेन और अमेरिका की भी फिल्मों में काम किया. ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (पुणे) में एक साथ पढ़ाई कर चुके हैं.
उन्हें पहली फिल्म के मेहनताने के तौर पर मूंगफलियां मिली थीं. ओम पुरी के फिल्मी करियर की शुरुआत 1976 में मराठी फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से हुई थी. यह फिल्म विजय तेंदुलकर के प्रसिद्ध मराठी नाटक पर आधारित थी. पहली कमाई के रूप में मूंगफलियां मिलने की बात ओम पुरी ने खुद एक साक्षात्कार में कही थी.
वर्ष 1980 में रिलीज फिल्म 'आक्रोश' ओम पुरी के करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई.
ओम पुरी ने चरित्र अभिनेता के अलावा नकारात्मक भूमिकाएं भी निभाईं. उनका हास्य गजब का था. उन्होंने 'जाने भी दो यारों' जैसी डार्क कॉमेडी से लेकर आज के जमाने की हास्य फिल्मों तक में काम किया.
हाल ही में उन्होंने हॉलीवुड एनिमेशन फिल्म 'जंगल बुक' में एक किरदार को अपनी आवाज भी दी थी. 'घायल वंस अगेन' उनकी आखिरी व्यावसायिक फिल्म रही.
उनकी मशहूर कला फिल्मों में 'अर्धसत्य', 'सद्गति', 'भवनी भवाई', 'मिर्च मसाला' और 'धारावी' आदि शामिल हैं. इसके अलावा उन्होंने 'हेराफेरी', 'सिंह इज किंग', 'मेरे बाप पहले आप', 'बिल्लू' जैसी फिल्मों में दर्शकों को खूब हंसाया.
उन्होंने टेलीविजन के लिए भी काम किया. 'भारत एक खोज', 'यात्रा', 'कक्काजी कहिन', 'अंतराल', 'आहट' और 'तमस' जैसे धारावाहिकों से उन्होंने छोटे पर्दे के दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया.
ओम पुरी ने बॉलीवुड सिनेमा, बल्कि पाकिस्तानी, ब्रिटिश और हॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी बेमिसाल अदाकारी के लिए जाने जाते रहे. वर्ष 1990 में भारत सरकार ने इस महान अभिनेता को पद्मश्री की उपाधि से अलंकृत किया. 'आरोहण' और 'अर्धसत्य' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी ओम के हाथ आया.
उनके दुनिया से ओझल हो जाने की खबर सुनकर करोड़ों प्रशंसक और सिनेमा जगत के हर सितारे बेहद सूनापन महसूस कर रहे हैं. ओम पुरी ने भले ही हमें अचानक अलविदा कह दिया हो, लेकिन उनकी प्रतिभा और आम आदमी से सशक्त अंतर्राष्ट्रीय अभिनेता बनने के उनके सफर को हमेशा याद किया जाएगा.
ग्लैमर की दुनिया माने जाने वाले बॉलीवुड में ओम पुरी ही ऐसा शख्स हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिखाया कि सशक्त अभिनेता बनने के लिए खूबसूरत होना जरूरी नहीं है. बेमिसाल अभिनेता को सहस्र श्रद्धासुमन.