कॉमेडियन कुणाल कामरा ने फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी से हटाए जाने के बाद सेंसर बोर्ड से तीखे सवाल किए और साथ ही सरकार को भी सवालों के घेरे में ले लिया है. उन्होंने नेहरु के जमाने के इंडिया को लेकर भी बात की. उन्होंने लंबा-चौड़ा पोस्ट किया है और पूछा कि जब 'कश्मीर फाइल्स' जैसी फिल्मों को रेड कार्पेट मिल रहा है तो 'सतलुज' को क्यों हटाया जा रहा है.

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कुणाल कामरा ने पोस्ट कर किए सवाल

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कुणाल कामरा ने पोस्ट कर लिखा, 'मिस्टर प्रसून जोशी क्या प्लीज बताएंगे कि फिल्म 'पंजाब 95' के लिए 127 कट्स लगाने की सिफारिश क्यों की गई थी? जब उसी फिल्म का नाम बदलकर अब 'सतलुज' कर दिया गया है तो उसे दो दिन से भी कम समय में एक OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. जबकि OTT प्लेटफॉर्म्स या इंटरनेशनल रिलीज पर सेंसर बोर्ड का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है.'

आगे उन्होंने कहा, ''पंजाब 95' में जसवंत सिंह खालरा की कहानी बताई गई. जिन्होंने मानवाधिकारों के हनन के पुख्ता सबूत दुनिया के सामने रखे थे. और इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी. अगर डॉक्यूमेंटेड फैक्ट्स पर बेस्ड फिल्म को इंडियन ऑडियंस नहीं देख सकती तो ये जानने का पूरा हक है कि ऐसा आखिर क्यों हो रहा है?'

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आगे उन्होंने कहा, ''कश्मीर फाइल्स', 'बंगाल फाइल्स' और 'केरला स्टोरीज' को रेड कार्पेट मिल रहा. धुरंधर और धुरंधर 2 जैसी फिक्शनल डॉक्यूमेंट्री को बढ़ावा मिल रहा है,जो अकल्पनीय चीजों को सही ठहराती है. नेहरू के भारत में ये मामला कोर्ट में लड़ा जाता. अगर फिल्ममेकर उन लोगों की कहानियां नहीं बता सकते जिन्होंने न्याय के लिए आवाज उठाई तो हम उन्हें किस तरह के सिनेमा को बनाने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं? जसवंत सिंह खालरा की एक बार फिर किडनैपिंग हो गई और इस बार सेंसर बोर्ड ने की'.

बता दें कि 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर स्ट्रीम किया गया था. लेकिन फिल्म को रविवार शाम तक हटा दिया. इसके बाद दिलजीत दोसांझ ने भी रिएक्ट किया. वो फिल्म में लीड रोल में हैं. दिलजीत ने कहा कि अब फिल्म को कोई रोक नहीं सकता. फिल्म लोगों के घर-घर में पहुंच गई है.