बॉलीवुड के मशहूर सिंगर कुमार सानू ने 90 के दशक से ही अपनी मखमली आवाज का जादू बिखेरा हुआ है. कुमार सानू ने यूं तो कई फिल्मों में गाने गाए हैं. वो भी ऐसे गाने जो आज तक जुबान पर चढ़े हुए हैं. आज भी लोग उनकी आवाज के कायल हैं. वैसे तो उन्होंने कई गाने गाए हैं लेकिन कई गाने ऐसे भी हैं जो वो नहीं गा पाए, उन्हें ऑफर नहीं हुए या उन्हें ऑफर हुए पर वो कर नहीं पाए. इस बात का कुमार सानू को काफी मलाल भी है.

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दरअसल हाल ही में कुमार सानू शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट का हिस्सा बने थे. इस दौरान उन्होंने अपने करियर, गाने और जर्नी को लेकर कई सारी बातें कीं. कुमार सानू ने इस इंटरव्यू के दौरान अपने और एआर रहमान के संबंधों पर भी बात की. इसी दौरान उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें 'रोजा' फिल्म के गानों को गाने का मौका नहीं मिला इस बात का उन्हें मलाला है. हालांकि उन्होंने बताया कि केवल ये ही नहीं बल्कि और भी कई फिल्में हैं जिनमें गाने क मौका नहीं मिला लेकिन सबसे ज्यादा मलाल 'रोजा' के लिए ही है.

इन गानों के नहीं मिलने का है दुखइस इंटरव्यू में जब कुमार सानू से पूछा कि ऐसे कौन से गाने हैं जो आपको नहीं मिलने पर आप दुखी हुए. आपको ऐसा लगा कि ये अगर आपको मिलते तो आप और बेहतर गा सकते थे. ऐसे में सिंगर ने कहा कि ऐसे तो बहुत से गाने हैं. बहुत से सिंगर हैं जैसे उदित जी और अभिजीत भट्टाचार्जी के कुछ गाने हैं जो मुझे मिलते तो और अच्छा रहता. उन्होंने पहले कहा कि 'लगान' फिल्म का एक गाना है जो उदित जी ने गाया था, उसे मैं ज्यादा अच्छे से गा सकता था. मेरी आवाज के साथ वो गाना ज्यादा अच्छा लगता.

रहमान संग मिसअंडरस्टैंडिंगअपने और एआर रहमान के बीच के संबंधों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'रहमान साहब के लिए मैंने गाया है एक गाना 'कभी ना कभी', मैंने उनके लिए बहुत पहले ये गाना गाया था इसके बाद कुछ मिसअंडरस्टैंडिंग हो गई 'रोजा' फिल्म के लिए. उस समय मैं और भी गाने कर रहा था तो मेरे लिए ये पॉसिबल नहीं था कि मैं मद्रास में जाकर रिकॉर्ड करूं. ये बात उन्होंने दिल पर ले ली और इसी बात का मुझे रिग्रेट है कि मैं 'रोजा' नहीं कर पाया. मैंने उन्हें कह दिया था कि अगर आपको शूट करना है तो मुंबई में आकर करो, मैं वहां नहीं आऊंगा.'

बस यही वजह रही कि ऑडियंस को भी कभी कुमार सानू और एआर रहमान की जुगलबंदी देखने को नहीं मिल पाई. कुमार सानू ने ये भी कहा कि वो अपने कमिटमेंट को लेकर बहुत सीरियस रहते हैं. उस समय भी ऐसा ही हुआ था और ये बात शायद एआर रहमान साहब समझ नहीं पाए. खैर बात जो भी हो लेकिन इस बेहतरीन जुगलबंदी को देखने से दर्शक तो चूक ही गए.