मुंबई: भारत में ऐसी कम ही अभिनेत्रियां हैं जिन्होंने एक दो नहीं, बल्कि चार-चार फिल्म इंडस्ट्री में काम किया. श्रीदेवी ने अपने तीन दशक लंबे करियर में लगभग 300 फिल्मों में काम किया. इनमें 63 हिंदी, 62 तेलुगू, 58 तमिल और 21 मलयालम फिल्में शामिल हैं बाल कलाकार से अपने करियर का सफर शुरू करने वाली श्रीदेवी ने 12 साल की उम्र में बॉलीवुड में छोटी बच्ची के किरदार में कदम रखा, लेकिन उससे पहले दक्षिण की फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर अपना नाम रोशन कर चुकी थीं. इसके बाद उन्होंने 15 साल की उम्र में बॉलीवुड में बाकायदा कदम रखा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. ये सफर लगातार जारी रहा. हां, उसमें ब्रेक जरूर आया. साल 1996 में निर्देशक बोनी कपूर से शादी के बाद श्रीदेवी ने फिल्मी दुनिया से अपनी दूरी बना ली. लेकिन इस दौरान वह कई टीवी शो में नजर आईं. श्रीदेवी ने साल 2012 में गौरी शिंदे की फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' से रूपहले परदे पर अपनी वापसी की. हिंदी सिनेमा से कई वर्षो तक दूर रहने के बाद भी फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' में उन्होंने बेहतरीन अभिनय से आलोचकों और दर्शकों को चौंका दिया था. उन्हें भारत सरकार ने साल 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया. इसके अलावा उन्हें 'चालबाज' (1992) और 'लम्हे' (1990) के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है. उन्होंने 'जैसे को तैसा', 'जूली', 'सोलहवां साल', 'हिम्मतवाला', 'जस्टिस चौधरी', 'जानी दोस्त', 'कलाकार', 'सदमा', 'अक्लमंद', 'इन्कलाब', 'जाग उठा इंसान', 'नया कदम', 'मकसद', 'तोहफा', 'बलिदान', 'मास्टर जी', 'सरफरोश','आखिरी रास्ता', 'भगवान दादा', 'धर्म अधिकारी', 'घर संसार', 'नगीना', 'कर्मा', 'सुहागन', 'सल्तनत', 'औलाद', 'हिम्मत और मेहनत', 'नजराना', 'जवाब हम देंगे', 'मिस्टर इंडिया', 'शेरनी', 'सोने पे सुहागा', 'चांदनी', 'गुरु', 'निगाहें', 'बंजारन', 'फरिश्ते', 'पत्थर के इंसान', 'लम्हे', 'खुदा गवाह', 'हीर रांझा', 'चंद्रमुखी', 'गुमराह', 'रूप की रानी चोरों का राजा', 'चांद का टुकड़ा', 'लाडला', 'आर्मी', 'मि. बेचारा', 'कौन सच्चा कौन झूठा', 'जुदाई', 'मिस्टर इंडिया 2' जैसी फिल्मों में काम किया.