Satluj Controversy: फिल्म बनने के बाद रोक लगाना पूरी टीम के साथ अन्याय, 'सतलुज' विवाद पर बोले कंवलजीत सिंह
Kanwaljit Singh on Satluj Controversy: 'सतलुज' विवाद पर कंवलजीत सिंह ने कहा कि कलाकार का काम सिर्फ अपना किरदार निभाना है. उन्होंने भरोसा जताया कि फिल्म एक दिन जरूर रिलीज होगी.

एक्टर और गायक दलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी के बीच वरिष्ठ एक्टर कंवलजीत सिंह ने मंगलवार को आईएएनएस से खास बातचीत की. उन्होंने फिल्म के बारे में बात करते हुए बताया कि किसी भी एक्टर का पहला दायित्व अपने किरदार को ईमानदारी से निभाना होता है, जबकि किसी फिल्म को लेकर बाद में पैदा होने वाले विवादों पर फैसला संबंधित संस्थाओं और निर्माताओं का होता है.
किरदार के लिए कैसी करी पूरी तैयारी?
एक्टर ने कहा, 'फिल्म 'सतलुज' में उन्होंने अपने करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया. ये पहली बार था, जब मैं इतने बेरहम इंसान का किरदार निभा रहा था. मैंने पहले भी ऐसा किया था, लेकिन वे किरदार इतना बेरहम नहीं था. ये दिलचस्प था, जब मुझे बताया गया कि मैं एक खास व्यक्ति का किरदार निभाने जा रहा हूं. एक ऐसी कहानी जो सच है और जिसके बारे में कभी बात नहीं हुई, जो हमारे इतिहास का हिस्सा है और इसीलिए मुझे इसमें दिलचस्पी हुई.'
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उन्होंने बताया, 'फिल्म में मेरा किरदार पंजाब के एक वरिष्ठ अधिकारी से इंस्पायर था. किरदार की तैयारी के लिए मैंने उस अधिकारी के बारे में इंटरनेट पर अवेलेबल इनफार्मेशन पढ़ी, उनके भाषण देखे और उनके व्यक्तित्व को समझने की कोशिश की. हालांकि डायरेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मैं किसी की नकल न करूं, बल्कि अपने एक्टिंग के जरिए किरदार को जीवंत बनाऊं. शायद मेकअप की वजह से लोग मुझे उस अधिकारी जैसा समझने लगे.'
रिलीज न होने से पूरी टीम निराश
फिल्म की रिलीज में आई बाधाओं पर उन्होंने कहा, 'कई बार किसी फिल्म के रिलीज न होने के पीछे केवल विवाद ही कारण नहीं होते. आर्थिक, तकनीकी और अन्य व्यावहारिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं. जब किसी फिल्म पर वर्षों तक मेहनत की जाती है और वे दर्शकों तक नहीं पहुंच पाती तो कलाकारों और पूरी टीम को स्वाभाविक रूप से निराशा होती है.' उन्होंने इसकी तुलना एक लेखक द्वारा सालों की मेहनत से लिखी गई किताब के प्रकाशित न होने से की.
एक दिन जरूर रिलीज होगी 'सतलुज'
कंवलजीत सिंह ने भरोसा जताया, 'सतलुज' एक दिन जरूर रिलीज होगी. इस फिल्म से जुड़े हर व्यक्ति, चाहे वे स्पॉट बॉय हो, तकनीशियन हो या डायरेक्टर, सभी ने पूरी लगन से काम किया है. ऐसे में पूरी टीम की यही इच्छा और प्रार्थना है कि दर्शकों को हमारा काम देखने का अवसर मिले.'
विवाद पर क्या बोले?
उन्होंने फिल्म से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए कहा, 'ये मामला करीब ढाई से तीन साल तक विभिन्न स्तरों पर चलता रहा. फिल्म के निर्माताओं और डायरेक्टर की सराहना होनी चाहिए. बाहरी दबावों के बावजूद अपने रुख से समझौता नहीं किया. एक समय फिल्म में बड़ी संख्या में कट लगाने की बात कही गई और बाद में इसे कनाडा फिल्म फेस्टिवल से भी वापस ले लिया गया. समय के साथ सिचुएशन बदलती हैं और समाज संवाद के माध्यम से समाधान खोज सकता है. इसलिए लंबे समय बाद फिल्मों को लेकर भय या टकराव की मानसिकता उचित नहीं है.'
एक्टर ने कहा, 'जब किसी कलाकार को कोई भूमिका मिलती है तो उसके मन में सबसे पहले विवाद नहीं, बल्कि कहानी और किरदार आता है. यदि एक्टर हर समय ये सोचता रहे कि फिल्म पर कैसी रिस्पॉन्स आएगें, तो वे अपने एक्टिंग पर पूरा ध्यान नहीं दे पाएगा. कलाकार का कर्तव्य है कि वे अपने किरदार को पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ पर्दे पर उतारे.'
उन्होंने ये भी सुझाव दिया, 'यदि किसी विषय पर आशंकाएं हैं तो फिल्म निर्माण शुरू होने से पहले ही आवश्यक मंजूरियां और आपत्तियों का समाधान कर लिया जाना चाहिए. फिल्म बनने के बाद जब उस पर भारी निवेश, समय और मेहनत लग चुकी हो, तब उसे रोकना या बड़े बदलाव की मांग करना पूरी टीम के साथ अन्याय है.'
बातचीत से निकल सकता है हल
कंवलजीत सिंह ने कहा, 'भारतीय सिनेमा में रचनात्मक अभिव्यक्ति और 'सेंसिटिव मुद्दे' के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. मेरा मानना है कि संवाद, पारदर्शिता और समय रहते निर्णय लेने से ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है, जिससे कलाकारों और निर्माताओं की वर्षों की मेहनत व्यर्थ न जाए.'
























