हाल ही में सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को अपने फैसलों की वजह से सोशल मीडिया पर और फ़िल्म इंडस्ट्री से काफी ट्रोलिंग झेलनी पड़ी है. इसकी वजह ये है सीबीएफसी ने हालिया रिलीज कई फिल्मों 'है जवानी तो इश्क होना है' और 'बंदर' में काफी कांट-छांट की थी. वहीं ब्लॉकबस्टर फिल्म 'ऑब्सेशन' के भी कुछ अहम सीन को हटाने के आदेश दिए गए थे. इस कारण कई दिनों तक ज़बरदस्त हंगामा हुआ. वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड ने इस हफ्ते हैरानी भरा नरम रुख अपनाते हुए तीन अहम फिल्मों को बिना कैंची चलाए पास कर दिया है.  

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'भारत भाग्य विधाता' का सर्टिफ़िकेशन और रनटाइमसीएफएसी से जीरो कट सर्टिफिकेशन के साथ पास हुई पहली फ़िल्म कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता' है, ये 26/11 के आतंकी हमलों पर बेस्ड है.  इस थ्रिलर फ़िल्म को एग्ज़ामिनिंग कमिटी ने U/A 16+ रेटिंग दी है. हालांकि इतने सेंसटिव और वॉयलेंस वाले सब्जेक्ट पर बनी फिल्मों को कई ऑडियो या विज़ुअल आब्जेक्शन का सामना करना पड़ता है, लेकिन ताज्जुब की बात है कि सीबीएफसी ने इसके  यहां किसी भी हिस्से को हटाने की ज़रूरत नहीं समझी. 29 मई को जारी सेंसर सर्टिफ़िकेट के अनुसार, फ़िल्म का कुल रनटाइम लगभग 127 मिनट यानी करीब 2 घंटे 7 मिनट है. ये फिल्म 12 जून, शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है

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'हॉन्टेड – इकोज़ ऑफ़ द पास्ट' जीरो कट के साथ हुई पासबिना किसी कांट छांट के सीबीएफसी द्वारा पास की गई दूसरी फिल्म विक्रम भट्ट की 'हॉन्टेड – इकोज़ ऑफ़ द पास्ट'  है. इस फिल्म के साथ विक्रम एक बार फिर 3D हॉरर जॉनर में वापसी कर रहे हैं. फिल्म में मिमोह चक्रवर्ती ने लीड रोल प्ले किया है. बता दें कि इस फ़िल्म को सीबीएफसी से 'A' रेटिंग मिली है.  आम तौर पर, एडल्ट रेटिंग वाली हॉरर फ़िल्मों में डरावने सीन्स या इंटीमेट सीन्स पर सीबीएफसी की कैंची जरूर चलती है. लेकिन हैरानी की बात है कि ये फ़िल्म बिना किसी विज़ुअल या ऑडियो कट के पास हो गई है. 9 जून को जारी सर्टिफ़िकेट के मुताबिक इसका रन टाइम 139 मिनट यानी 2 घंटे 19 मिनट है.

बैकरूम्स' पर भी नहीं चली सीबीएफसी की कैंचीसीबीएफसी से 'क्लीन चिट' पाने वाली तीसरी फ़िल्म हॉलीवुड की साइ-फ़ाई साइकोलॉजिकल हॉरर फ़िल्म 'बैकरूम्स'  है. हाल ही में बिना ज़्यादा प्रमोशन के हिट हुई फ़िल्म 'ऑब्सेशन' की तरह ही, इस फ़िल्म को लेकर भी लोगों में काफ़ी एक्साइटमेंट हैं. वहीं सीबीएफसी ने 8 जून को बिना किसी कट के इसे 'A' रेटिंग दी. यह फ़िल्म काफ़ी छोटी है. इसका रनटाइम 1 घंटा 51 मिनट है.

सीबीएफसी ने क्यों दिया जीरो कट सर्टिफिकेटसीबीएफसी के इस फैसले को फ़िल्ममेकर्स और दर्शकों के साथ चल रहे तनाव को कम करने की एक सोची-समझी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा ह.  इन बड़ी थ्रिलर और हॉरर फ़िल्मों को उनके ओरिजिनल विज़न के साथ रिलीज़ करने की मंजूरी देकर, बोर्ड शायद एडल्ट-ओरिएंटेड कंटेंट की लिए ज़्यादा बैलेंस्ड नज़रिया अपनाने का संकेत दे रहा है. फ़िलहाल, दर्शक इन फ़िल्मों को ठीक उसी तरह देख पाएंगे जैसा डायरेक्टर चाहते थे.

 

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