Ideas Of India Summit 2025: एबीपी न्यूज के आइडियाज ऑफ इंडिया समिट में अलग-अलग क्षेत्र के कई दिग्गजों ने शिरकत की. एक्ट्रेस तापसी पन्नू, भूमि पेडनेकर और दिग्गज एक्टर अमोल पालेकर के बाद बॉलीवुड के फेमस सिंगर पापोन भी मंच पर आए और उन्होंने अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को लेकर खुलकर बात की.

पापोन कैसे बने सिंगर ?

सिंगर ने इस दौरान अपने सिंगिंग करियर पर बात की. उन्होंने कहा कि, ‘असम में हिंदी गाने बहुत ही कम चलते थे. कभी-कभी मैं इन्हें किसी सैलून में सुनता था. हालांकि म्यूजिकल परिवार से हूं तो मैं हिंदी गाने सुन लेता था. लेकिन मेरी हिंदी में काफी गलतियां होती रहती है. क्योंकि वहां पर हिंदी भाषा कम ही चलती थी.’

दिल्ली में गाना गाकर पापोन ने सुधारी हिंदी

सिंगिंग का शौक रखने वाले पापोन अपने गांव से दिल्ली पहुंचे. जहां उन्होंने शुरुआत में कई लोगों की छोटी-छोटी पार्टियों में गाना गाया. वहां से ही उनकी हिंदी में भी काफी सुधार आया था. मैं मुंबई को सपना लेकर नहीं आया था. क्योंकि मैंने ये कभी सोचा ही नहीं था. अभी मैं जहां हूं, मैं यकीन ही नहीं करता.’

नोएडा के लिए निकले, फिर कैसे मुंबई पहुंचे पापोन?

सिंगर ने कहा कि, ‘फिर एक प्रीतम दा ने मुझे एक गाने के लिए मुंबई बुलाया. मैं घर से नोएडा के लिए निकला था लेकिन फिर मुंबई पहुंच गया. क्योंकि मेरी वाइफ ने कहा था कि एक बार जाने में कोई हर्ज नहीं. इसके बाद अभी भी मैं बस चल ही रहा है. देखता हूं अगर कुछ अच्छा हो जाए तो. वहीं मुंबई को लेकर पापोन ने कहा कि, ये सब लोग एक-दूसरे हौसला बढ़ाता है. यहां आपके ऊपर सभी भरोसा करते हैं. ये सब देखकर आपने में भी आत्मविश्वास आता है कि हां आप कुछ तो कर ही लोगे.’  

सिंगर ने क्यों रखा पापोन नाम?

सिंगर ने कहा कि मेरे असली नाम को लोग हमेशा गलत ही लेते थे. मेरा नाम अंगराग है. लेकिन किसी को वो समझ नहीं आया. इसलिए मैंने पापोन रखा. ये मेरा निक नेम है. तो मैंने इसे ही अपने करियर के लिए चुन लिया. क्योंकि नाम क्या रखा है. लोगों को याद रहना जरूरी है. इस बात की सलाह में गुलजार साहब से भी ली थी. तो उन्होंने भी पापोन के लिए ही हामी भरी.  

कॉन्सर्ट मुझे महफिल लगते हैं - पापोन

सिंगर ने अपने कॉन्सर्ट को लेकर कहा कि, ‘पहले मैं दिल्ली में कुछ लोगों के लिए गाता था. कभी पांच लोगों के लिए गाता था. अब कॉन्सर्ट में हजारों की भीड़ आती है, लेकिन मुझे वो वैसे ही लगते हैं. मुझे ये सब एक महफिल की तरह ही लगता है. तो इसमें कोई ज्यादा फर्क नहीं है.’

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