रणबीर कपूर की अपकमिंग फिल्म 'रामायणम्' को लेकर काफी बज बना हुआ है. फिल्म को नितेश तिवारी डायरेक्ट कर रहे हैं. हाल ही में फिल्म का टीजर रिलीज़ हुआ, जिसपर दर्शकों से मिली जुली प्रतिक्रियाएं मिली. कुछ लोग ने इसके टीजर और फिल्म की जमकर तारीफ की तो वही कुछ ने इसके VFX पर कड़ी आलोचना की है. वहीं इस पर बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन ने रिएक्ट किया है.

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रामायण में VFX पर उठे सवालों पर ऋतिक रोशन ने किया रिएक्टऋतिक रोशन ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर रामायण के VFX की आलोचना पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट किया. उन्होंने पोस्ट में लिखा, "हां, खराब VFX होते हैं. कभी-कभी वो इतने खराब होते हैं कि उन्हें देखना तक मुश्किल हो जाता है. खासकर मेरे लिए तब और भी ज्यादा, जब वो मेरी ही फिल्म हो.''

ऋतिक रोशन ने याद करते हुए लिखा, '11 साल की उम्र में मैनें लंदन में 'बैक टू द फ्यूचर' फिल्म देखी थी, जिसने मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी.  मैं अपने पापा के VHS प्लेयर के साथ बैठकर, एक-एक फ्रेम को पॉज-प्ले करके तब तक देखता रहता, जब तक कि वह प्लेयर खराब नहीं हो गया. मैंने अपनी पॉकेट मनी से 'इंडस्ट्रियल लाइट एंड मैजिक: द आर्ट ऑफ स्पेशल इफेक्ट्स' नाम कि किताब ऑर्डर की थी और कई महीनों तक उसका इंतजार किया था कि वो जुहू पोस्ट ऑफिस पर आए. आज भी याद है वो दिन जब उस किताब को पढ़ा था.'

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फिल्ममेकर्स की तारीफ में कही ये बातउन्होंने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, 'आज भी इंडस्ट्री में कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हें वह असली हीरो मानते हैं. फिल्में जैसे कल्कि, बाहूबली, रामायण (मेरे पापा भी जिन्होंने कोई मिल गया और कृष) जिन मेकर्स ने बनाई उनके पास वो विजन है, जो इस तरह की कहानियों को बड़े पर्दे पर दिखा सकते हैं. ये मेरे हीरोज हैं. मेरी समझ में इन लोगों ने वो सारा पैसा इसलिए लगाया कि मेरे जैसे किसी 11 साल के बच्चे को वो एक्सपीरियंस दिया जा सके, जो मुझे मिला था.'

वीएफएक्स की फिल्म को बनाने में कई सालों की मेहनत होती है- ऋतिक ऋतिक ने आगे लिखा 'ये पोस्ट मेरे बारे में नहीं है. ये ऑडियंस के लिए है. किसी बड़े बजट की हेवी वीएफएक्स की फिल्म को बनाने में कई आर्टिस्टों की सालों की मेहनत होती है, तो उनको इस तरह से बैश करने से पहले हमें थोड़ा सोचना चाहिए. किसी माइथोलॉजी में फोटोरियलिज्म लाना इतना आसान काम नहीं है. जितना मैंने सीखा है उस हिसाब से वीएफएक्स के कई स्टाइल होते हैं, ताकि किसी मेकर के विजन को स्क्रीन पर उतारा जा सके.'

एक्टर ने अपनी बात रखते हुए समझाया कि हर दर्शक की पसंद अलग होती है, ठीक वैसे ही जैसे किसी को एनिमे पसंद आता है तो किसी को 'स्पाइडर मैन: इन स्पाइडर-वर्स' जैसा स्टाइल. इसका मतलब यह नहीं है कि एक सही है और दूसरा गलत. इसी तरह फिल्मों में वीएफएक्स के भी कई तरह के स्टाइल होते हैं. कुछ फिल्में फोटोरियलिस्टिक अप्रोच अपनाती हैं. वहीं कुछ मेकर्स स्टाइलाइज्ड वीएफएक्स के जरिए कहानी को ज्यादा विजुअली अट्रैक्टिव बनाने की कोशिश करते हैं.