बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर रहे दिलीप कुमार का 7 जुलाई को निधन हो गया. वह 98 साल के थे. उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ मुंबई में किया गया. लेकिन उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हो गईं जिनमें दावा किया गया कि उन्होंने मरने से पहले 98 करोड़ रुपए की संपत्ति वक्फ बोर्ड को दे दी है.
ट्विटर और फेसबुक पर ऐसे कई पोस्ट थे जिनमें कुछ इस तरह से लिखा था, "मुहम्मद यूसुफ उर्फ दिलीप कुमार के लिए आंसू बहाने वाले काफिर दोगलों... आंखे खोलो और देखो! ... वो अपनी संपत्ति वक्फ बोर्ड को देकर गया है लेकिन मंदिरों को फूटी कौड़ी भी नहीं दी."
एक ट्विटर यूजर ने लिखा,"मुतलिमों की क्रोनोलॉजी समझेः दिलीप कुमार का असल नाम यूसुफ खान जीते जी हिंदू नाम रखकर बॉलीवुड में खूब पैसा कमाया, लेकिन मरसे वक्त 98 करोड़ रुपए की अपनी प्रॉपर्टी किसी वृद्ध आश्रम या अनाथालय चलाने वाले किसी एनजीओ को नहीं अपने मजहबी मुतलिम वक्फ बोर्ड के नाम कर गए!"
दावे झूठे हैं
लेकिन पड़ताल पता में पता चला है कि ये सभी दावे झूठे हैं. दिलीप कुमार ने अपनी संपत्ति वक्फ बोर्ड को नहीं दी है. मेन स्ट्रीम मीडिया में इस तरह की कोई खबर नहीं आई है. दिलीप कुमार का सोशल मीडिया अकाउंट संभालने वाले फैसल फारूकी ने भी इसकी पुष्टि की है.
मैनेजर फैसल फारूकी ने किया खारिज
फैसल फारुकी ने कहा,"जैसा की सोशल मीडिया पोस्ट पर दावा किया जा रहा है, दिवंगत दिलीप कुमार ने अपनी प्रोपर्टी वक्फ बोर्ड को नहीं दी है. इस तरह की गलत जानकारी नफरत बनाने और बढ़ाने के लिए शेयर की जा रही है. इस मामले मैं, एक दिवंगत एक्टर का अपमान किया जा रहा है."
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