बॉलीवुड के मशहूर म्यूजिक कंपोजर और सिंगर मिथुन उन कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी धुनों से न सिर्फ हिट गाने दिए बल्कि दिलों में भी खास जगह बनाई. वह अक्सर नए कलाकारों को प्रेरित करते नजर आते हैं और अपने अनुभवों के जरिए बताते हैं कि म्यूजिक इंडस्ट्री में टिके रहना सिर्फ टैलेंट नहीं, बल्कि सही सोच और सब्र भी मांगता है. हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने संगीत, टैलेंट और किस्मत को लेकर खुलकर अपनी राय रखी.
टैलेंट और किस्मत पर की बातहाल ही में शुभांकर मिश्रा संग बातचीत में टैलेंट और किस्मत को लेकर बात की. उन्होंने बताया की सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपका लक्ष्य क्या है और आप संगीत क्यों करना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि कई ऐसे कलाकार भी होते हैं जिनकी बहुत रीच नहीं होती या मेनस्ट्रीम का हिस्सा नहीं बन पाते, लेकिन फिर भी वे अपनी जिंदगी से पूरी तरह संतुष्ट रहते हैं. ऐसे कलाकार अपने सपने को जीते हैं और संगीत को दिल से जीते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कॉमर्स में तकदीर होता है ये बात अलग है.
छोटी सी उम्र में शुरू किया करियरबता दें, बॉलीवुड में रूहानी संगीत और दिल छू लेने वाली मेलोडी की जब भी बात होती है, मिथुन का नाम सबसे ऊपर आता है. संगीत की विरासत में जन्मे मिथुन ने महज 7 साल की उम्र में संगीत का साथ पकड़ लिया था. दिग्गज संगीतकार प्यारेलाल के भतीजे होने के नाते संगीत उनके खून में था, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान खुद बनाई.
मिथुन ने करियर की शुरुआत 2005 में फिल्म ‘जहर’ के गाने ‘वो लम्हे’ से की, जो रीक्रिएटेड था. इसके बाद ‘कलियुग’ में ‘अब तो आदत सी है मुझको’ जैसे गाने ने उन्हें नोटिस करवाया. असली सफलता उन्हें साल 2007 में मिली, जब फिल्म ‘अनवर’ के गाने ‘तोसे नैना लागे’ और ‘मौला मेरे’ सुपरहिट हुए, लेकिन सबसे बड़ा ब्रेकपॉइंट आया ‘तेरे बिन’ गाने से, जिसे आतिफ असलम ने गाया था. इस गाने ने उन्हें पहला स्टारडस्ट अवॉर्ड दिलाया और उन्हें ‘तेरे बिन’ कंपोजर के नाम से जाना जाने लगा.
