फिल्म और टीवी कलाकारों की सबसे बड़ी संस्था 'सिंटा' (CINTAA) में आपस में झगड़ा चल रहा है. संस्था के भीतर मचे घमासान के चलते एक साथ 8 चुने हुए एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने वाले दिग्गजों में हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, पुनीत इस्सर और बिंदु दारा सिंह जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
इन बागी सदस्यों ने का आरोप है कि सिंटा अध्यक्ष पूनम ढिल्लों और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे सत्ता का दुरुपयोग कर रही हैं. ये लोग मनमाने फैसले ले रहे हैं और इस संस्था में अब पारदर्शिता की कमी है.
इस सामूहिक इस्तीफे के बाद से इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया है और तुरंत नए चुनाव कराने की मांग जोर पकड़ रही है. ऐसी खबरें भी फैली हैं कि सिंटा की कार्यकारी समिति भंग हो गई है.
इन आरोपों पर सिंटा ने अपना रिएक्शन दिया है और कहा है कि संस्था को लेकर जो भी खबरें फैलाई जा रही हैं वो वो गलत, भ्रामक और संघ के संविधान के खिलाफ है.
सिंटा ने आरोपों पर क्या कहा
CINTAA ने कहा है, 'यह खबर फैलाई गई कि उसकी चुनी हुई कार्यकारी समिति अब अस्तित्व में नहीं है. CINTAA के मुताबिक उसके संविधान में यह स्पष्ट है कि कार्यकारी समिति केवल तभी भंग मानी जा सकती है जब उसके 50% से अधिक चुने हुए सदस्य इस्तीफा दे दें. ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है, इसलिए कार्यकारी समिति पूरी तरह वैध, सक्रिय और कार्यरत है.'
सिंटा ने यह भी साफ किया कि समिति में जो भी पद खाली हुए थे, उन्हें योग्य सदस्यों को शामिल करके भर दिया गया है.
कितने लोगों ने इस्तीफा दिया?
शुरुआत में 8 चुने हुए सदस्यों के इस्तीफे की खबर सामने आई लेकिन बगावत के पीछे कुल 11 सदस्यों की नाराजगी बताई जा रही है.
क्यों हुई बगावत?
ये सदस्य नाराज इस बात को लेकर हैं कि पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे की लीडरशिप में में सारा पावर सिर्फ 2-3 लोगों के एक 'कोर ग्रुप' में सिमट कर रह गया था. एग्जीक्यूटिव कमेटी के बाकी सदस्यों से जरूरी मामलों में राय तक नहीं ली जा रही थी.
सिंटा का बयान
CINTAA के कानूनी सलाहकार एडवोकेट सुविज्ञ विद्यार्थी ने कहा, 'CINTAA की कार्यकारी समिति के भंग होने की जो खबरें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह से गलत, निराधार और कानूनन अमान्य हैं. संविधान के अनुसार EC केवल तभी भंग हो सकती है जब 50% से अधिक सदस्य इस्तीफा दें, जो कि यहां नहीं हुआ है.'
