BAFTA अवॉर्ड के बाद 'बूंग' ने बॉक्स ऑफिस पर बनाया रिकॉर्ड, री-रिलीज पर 1 करोड़ कमाने वाली बनी पहली मणिपुरी फिल्म
Boong Re-Release: फिल्म 'बूंग' ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. 6 मार्च को सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज होने के बाद, इस फिल्म ने 1 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है.

BAFTA अवॉर्ड अपने नाम करने वाली मणिपुरी फिल्म 'बूंग' ने हाल ही में एक और रिकॉर्ड अपने नाम किया है. 6 मार्च को सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज होने के बाद, इस फिल्म ने 1 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके साथ ही ये अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली मणिपुरी फिल्म बन गई है. फिल्म के दोबारा रिलीज होने से न केवल इसकी कहानी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंची, बल्कि भारतीय सिनेमा में इसकी पहचान भी और मजबूत हुई है. 'बूंग' ने बॉक्स ऑफिस पर ये शानदार मुकाम हासिल किया है, जो मणिपुर के क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक बहुत बड़ी और दुर्लभ उपलब्धि है.
ग्लोबल लेवल पर रच इतिहास
इस शानदार सफर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ते हुए, 'बूंग' ने ग्लोबल लेवल पर भी इतिहास रच दिया है. ये पहली भारतीय फिल्म बन गई है जिसने BAFTA अवॉर्ड जीता है. ये एक ऐसी ऐतिहासिक जीत है जिसने मणिपुरी सिनेमा को पूरी दुनिया में पहचान दिलाई है. ये सम्मान न सिर्फ फिल्म बनाने वालों के लिए, बल्कि पूरे भारतीय फिल्म जगत के लिए बहुत बड़ा पल है, जो हमारे देश के अलग-अलग कोनों से आने वाली कहानियों की ताकत और विविधता को दिखाता है.
कई फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई गई
लक्ष्मीप्रिया देवी द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म का प्रीमियर सबसे पहले टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था. इसके बाद इस फिल्म ने कई बड़े फिल्म फेस्टिवल्स का सफर तय किया, जिनमें वारसॉ, साओ पाउलो, एडिलेड और टालिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल जैसे नाम शामिल हैं. हर जगह इस फिल्म ने अपनी सादगी और दिल छू लेने वाली कहानी की वजह से खूब नाम कमाया.
क्या है फिल्म की कहानी
'बूंग' मणिपुर के एक छोटे से लड़के की कहानी है जिसका किरदार गुगुन किपगेन ने निभाया है. ये लड़का जो अपने टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ना चाहता है. बूंग की परवरिश उसकी सिंगल मदर मंदाकिनी (बाला हिजाम निंगथौजाम) ने की है. वो अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ मिलकर अपने लापता पिता को खोजने के एक भावुक सफर पर निकलता है. ये फिल्म उम्मीद, मुश्किलों से लड़ने की ताकत और मां-बेटे के गहरे रिश्ते जैसे बेहद जरूरी मुद्दों को छूती है.
Source: IOCL


























