'जानम समझा करो' ने आशा भोसले को दी नई पहचान, 60 की उम्र बनीं 'क्वीन ऑफ इंडिपॉप'
Asha Bhosle Queen of Indipop: आशा भोसले के निधन से पूरी इंडस्ट्री शोक में है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आशा भोसले को 'क्वीन ऑफ इंडीपॉप' भी कहा जाता है. इसी बीच आइए उनके इस सफर के बारे में जानते हैं.

बॉलीवुड संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया. चेस्ट इंफेक्शन और थकान के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके जाने से पूरी इंडस्ट्री में मातम छा गया है. इसी बीच उनकी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी चर्चा में आ गई है. इसी बीच आइए जानते हैं कि उन्हें 'इंडीपॉप की क्वीन' क्यों कहा जाता है?
आशा भोसले को मिला था एमटीवी अवॉर्ड
आशा भोसले ने 90 के दशक में एक नया चैप्टर शुरू किया. उस समय इंडीपॉप म्यूजिक का दौर शुरू हो रहा था, एमटीवी जैसे प्लेटफॉर्म आ चुके थे और लोग फिल्मों से अलग म्यूजिक सुनना पसंद करने लगे थे. ऐसे में जहां कई पुराने सिंगर्स पीछे हट रहे थे, वहीं आशा भोसले ने खुद को नए अंदाज में पेश किया. साल 1997 में उन्होंने 'जानम समझा करो' रिलीज किया, जो जबरदस्त हिट साबित हुआ और इस गाने के लिए उन्हें एमटीवी अवॉर्ड भी मिला. उस समय उनकी उम्र 60 साल से ज्यादा थी, फिर भी उन्होंने कई नए कलाकारों को कड़ी टक्कर दी.
इंटरनेशनल आर्टिस्ट के साथ भी किया काम
इसके बाद उन्होंने कई और पॉप एल्बम्स में गाना गाया. आदनान सामी के साथ उन्होंने 'कभी तो नजर मिलाओ' गाया. वहीं 'राहुल एंड आई' में उन्होंने आर डी बर्मन के पुराने गानों को नए अंदाज में पेश किया. 'आप की आशा' में उनका एक सॉफ्ट और इमोशनल अंदाज देखने को मिला, जिसमें 'ना मरते हम' जैसे गाने बहुत पसंद किए गए. यही नहीं, उन्होंने इंटरनेशनल आर्टिस्ट्स के साथ भी काम किया और उनका नाम विदेशों तक पहुंचा. ब्रिटिश बैंड कॉर्नरशॉप ने उनके नाम पर गाना 'ब्रिमफुल ऑफ आशा' बनाया, जो यूके चार्ट में टॉप पर पहुंचा.
कई तरह के गानों से खुद को किया साबित
बता दें कि पिता के निधन के बाद उन्होंने छोटी उम्र में ही गाना शुरू कर दिया था. शुरुआती दौर में उन्हें ऐसे गाने मिलते थे, जिन्हें दूसरे सिंगर गाना नहीं चाहते थे. लेकिन उन्होंने इन्हीं गानों को अपनी पहचान बना लिया. 60 और 70 के दशक में वो मशहूर डांसर हेलेन की आवाज बनी और 'पिया तू अब तो आजा', 'ओ हसीना जुल्फों वाली' और 'ये मेरा दिल' जैसे गाने दिए, जो आज भी हिट हैं. इसके बाद गजल, क्लासिकल और फिर पॉप म्यूजिक में उन्होंने खुद को साबित किया.
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