म्यूजिशियन ए आर रहमान के गाने लोगों की जुबां पर चढ़े रहते हैं. उनके गाने बहुत पसंद किए जाते हैं. ए आर रहमान का म्यूजिक लोगों के दिल को छूता है. हाल ही में उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को लेकर बात की.

Continues below advertisement

खुद को आउटसाइडर मानते थे ए आर रहमान

बीबीसी एशियन नेटवर्क से बातचीत में ए आर रहमान ने बताया कि वो बॉलीवुड में एक तमिल कंपोजर के तौर पर खुद को आउटसाइडर फील करते थे. जब तक कि सुभाष घई की ताल नहीं हुई. ए आर रहमान ने कहा, 'वास्तव में, रोजा, बॉम्बे, दिल से... के बाद भी मैं एक आउटसाइडर था. लेकिन ताल को घर-घर में पहचाना गया. ताल के गाने लोगों की जुबान पर चढ़ गए थे. यहां तक कि अभी भी कुछ नॉर्थ इंडियन ताल के गाने पसंद करते हैं क्योंकि इसमें थोड़ा पंजाबी टच था, थोड़ा हिंदी टच था और थोड़ा माउंटेन म्यूजिक था. एक तमिल शक्स का हिंदी बोलना मुश्किल होता है.'

Continues below advertisement

ए आर रहमान ने कहा कि सुभाष घई ने मुझे हिंदी सीखने के लिए कहा. इसके बाद मैंने उर्दू सीखी. इसके बाद उन्होंने अरेबिक सीखी और फिर पंजाबी क्योंकि वो सुखविंदर सिंह से इंफ्लुएंस थे.

'मैं काम ढूंढ़ने नहीं जाता हूं'

इसके अलावा जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें 1990 के दशक में बॉलीवुड में भेदभाव महसूस हुआ. तो इस पर उन्होंने कहा, 'शायद मुझे इसके बारे में पता ही नहीं चला. मुझे ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ, भगवान ने इसे छुपाकर रखा था. पिछले 8 साल में शायद क्योंकि पावर शिफ्ट की वजह से, अब पावर उन लोगों के पास है जो क्रिएटिव नहीं हैं. ये मेरे फेस पर नहीं है. मुझे दूसरों के जरिए पता चला कि उन्होंने मुझे बुक किया लेकिन फिर म्यूजिक कंपनी ने अपने 5 कंपोजर हायर कर लिए. तो मैंने कहा अच्छा है. मेरे पास अपनी फैमिली के साथ समय बिताने के लिए ज्यादा समय है. मैं काम की तलाश में नहीं हूं. मैं काम ढूंढ़ने नहीं जाता हूं. मैं चाहता हूं कि काम मेरे पास आए. मेरी ईमानदारी से मुझे काम मिले. मैं जो डिजर्व करता हूं वो मुझे मिले.'