Aditya Narayan Birthday: इस बात में कोई दो राय नहीं है कि आदित्य नारायण मल्टीटैलेंटेड हैं. वो एक अच्छे सिंगर होने के अलावा बेहतरीन होस्ट और एंकर भी हैं. वो बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट फिल्मों में भी काम कर चुके हैं. हालांकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि मल्टीटैलेंटेड होने के बावजूद उन्हें अपने पिता उदित नारायण जैसी लोकप्रियता और सफलता नहीं मिल पाई.
दिग्गज सिंगर उदित नारायण के घर में जन्मे आदित्य नारायण ने अपनी एक अलग पहचान बनाई. बचपन से ही उन्होंने गाना शुरू कर दिया था. बतौर चाइल्ड सिंगर वो कई गानों की आवाज बने और बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट भी उन्होंने फिल्मों में एक्टिंग की. लेकिन, इसके बावजूद वो कौन सी वजह रही कि वो सफलता के शिखर पर नहीं पहुंच पाए. आइए आज उनके जन्मदिन के मौके पर उन वजहों के बारे में जानते हैं.
7 साल की उम्र में नेपाली फिल्म के लिए गाया गाना
उदित नारायण और दीपा नारायण के घर उदित नारायण का जन्म 6 अगस्त 1987 को मुंबई में हुआ था. आज वो 39 साल के हो चुके हैं. संगीत आदित्य को विरासत में मिला था और उन्होंने महज 7 साल की उम्र में अपने पिता के साथ प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत कर दी थी. सबसे पहले उन्होंने साल 1994 की फिल्म 'मोहनी' का गाना 'यो गाउँको ठिटो' पिता के साथ गाया था.
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बॉलीवुड में 1995 में किया था बतौर सिंगर डेब्यू
नेपाली फिल्म के लिए गाने के अगले साल ही उन्होंने हिंदी सिनेमा के लिए भी बतौर चाइल्ड सिंगर अपनी शुरुआत कर दी थी. इस बार भी उन्हें पिता उदित नारायण का साथ मिला था. आदित्य ने 'अकेले हम अकेले तुम' फिल्म के लिए गाया था. लेकिन, उन्हें बतौर चाइल्ड सिंगर सबसे बड़ी पहचान मिली थी 'छोटा बच्चा समझ के' गाने से. ये साल 1996 की फिल्म 'मासूम' का गाना है.
1997 में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट डेब्यू
चाइल्ड सिंगर के रूप में पहचान बनाने के बाद आदित्य ने हिंदी सिनेमा में अपनी शुरुआत बाल कलाकार के रूप में साल 1997 की फिल्म 'परदेस' से की थी. इसके बाद वो 'जब प्यार किसी से होता है' फिल्म में भी दिखाई दिए थे. 'परदेस' महिमा चौधरी और शाहरुख़ खान की और 'जब प्यार किसी से होता है' ट्विंकल खन्ना और सलमान खान की मुख्य भूमिका वाली फिल्म थी.
लीड एक्टर के रूप में रहे फ्लॉप
बड़े होने पर भी आदित्य नारायण ने एक्टर के रूप में काम किया था. साल 2010 की फिल्म 'शापित' से उन्होंने लीड एक्टर के रूप में डेब्यू किया था. इसमें वो एक्ट्रेस श्वेता अग्रवाल के साथ नजर आए थे जो आगे जाकर उनकी पत्नी बनीं. हालांकि विक्रम भट्ट के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी.
होस्ट बनकर टीवी पर छा गए आदित्य
18 साल की उम्र में आदित्य नारायण ने सिंगिंग रियलिटी शो 'सा रे गा मा पा' को होस्ट किया था. उन्हें होस्ट के रूप में दर्शकों ने काफी पसंद किया था और उन्हें बड़ी पहचान मिल गई थी. इसके बाद उन्होंने इसके कई सीजन सफलतापूर्व होस्ट किए.
इसके बाद उन्होंने 'सा रे गा मा पा लिल चैंप्स' और इंडियन आइडल जैसे शोज भी होस्ट किए. यहां वो अपनी जबरदस्त ऊर्जा और हाजिरजवाबी से न सिर्फ फैंस के बल्कि जजेस के भी पसंदीदा बन गए. इनके अलावा आदित्य ने अन्य शोज में होस्ट और स्पेशल इवेंट्स में एंकर के रूप में भी खुद को साबित किया.
क्यों नहीं मिला पिता जैसा स्टारडम?
'कभी ना कभी तो मिलोगे', 'छोटा बच्चा जान के', 'ततड़ ततड़', 'मैं निकला गड्डी लेके' (रीमेक), 'कहीं आग लगे लग जाए', 'मैं डूबा रहूं' जैसे हिट गाने दे चुके आदित्य होस्ट के रूप में काफी पॉपुलर रहे. लेकिन, सिंगिंग में वो पिता के आगे फीके पड़ गए.
आदित्य के ऊपर शुरू से ही 'उदित नारायण का बेटा' होने का सबसे बड़ा दबाव रहा है. ऐसे में उनके लिए हमेशा से ही अपनी पहचान बनाना मुश्किल रहा. अमिताभ बच्चन-अभिषेक बच्चन और धर्मेंद्र-बॉबी देओल जैसे कई उदाहरण बॉलीवुड में मौजूद है.
आदित्य नारायण को ज्यादा लोकप्रियता और सफलता न मिलने का एक कारण ये भी रहा है कि उन्होंने टीनएज के बाद होस्टिंग और एंकरिंग को ज्यादा तवज्जो दी थी. फिर वो एक्टिंग फील्ड में भी गए. सिंगिंग को उन्होंने प्राथमिकता नहीं दी और इसका उन्हें संगीत करियर में फायदा भी नहीं मिला. उन्होंने बेहद कम सोलो गाने गाए हैं.
बॉलीवुड और संगीत जगत में आदित्य के पिता उदित नारायण की छवि बिल्कुल साफ रही है. हर कोई उन्हें पसंद करता है और उनका सम्मान करता है. जबकि आदित्य की पब्लिक में इमेज ऐसी नहीं रही है. साल 2017 में वो एक विवाद का भी हिस्सा बन गए थे. उस वक्त रायपुर एयरपोर्ट पर उनकी इंडिगो एयरलाइन के वर्कर्स से बहस हो गई थी और उन्होंने धमकी देते हुए कहा था, 'तेरी चड्डी ना उतारी मैंने तो मेरा नाम भी आदित्य नारायण नहीं.' इस विवाद के बाद आदित्य को काफी अलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.
