India at 2047: इम्तियाज अली की फिल्मों में क्यों होता है इतना दर्द? ABP के खास कार्यक्रम में खोला राज
ABP Network India at 2047 Conclave: एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम में मशहूर डायरेक्टर इम्तियाज अली ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' सहित कई मुद्दों पर बात की.
ABP नेटवर्क के India@2047 कॉन्क्लेव में मशहूर डायरेक्टर इम्तियाज अली ने भी हिस्सा लिया. इस दौरान डायरेक्टर ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' पर खुलकर बात की. बंटवारे के बैकग्राउंड पर बनी ये फिल्म एक लव स्टोरी पर बेस्ड है. उन्होंने फिल्म की कहानी और बंटवारे का जिक्र किया. साथ ही बताया कि उनकी फिल्मों में इतना दर्द क्यों होता है?
बंटवारे को लेकर की बात
सबसे पहले उन्होंने अपनी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' को लेकर बात करते हुए खुलासा किया कि ये फिल्म उसके बारे में है जब आप अपना घर छोड़ते वक्त अपने साथ जो ले जाते हैं. ये प्यार के और निजी जिंदगी में हुई त्रासदी के बारे में है. ऐसा बोलते हैं न कि जिंदगी में बहुत कठिनाई और तकलीफ होती है. खासकर वो लोग जो बंटवारे के वक्त के पीड़ित थे. बहुत सारे लोग ऐसे दिल्ली में भी हैं, उनमें से कई लोगों से मैंने बातें की थी. इम्तियाज ने बताया कि उनमें से सभी अपनी पुरानी यादों को लेकर बात करते हुए नजर आए. कोई नदी के किनारे को लेकर बात करता है तो कोई किसी लड़की को लेकर. इम्तियाज कहते हैं, 'वो सब अपनी प्यारी और खूबसूरत बातों को याद करते हैं.'
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आगे उन्होंने कहा, 'पंजाब में मैं शूटिंग करता रहा हूं और 'अमर सिंह चमकीला' भी वहां बनाई थी. जब पंजाब में लोगों से मुलाकात होती थी तो पता चला कि जो यहां से वहां गए थे या वहां से यहां आए थे, शायद ही किसी ने कहा न हो या सोचा न हो कि अब शायद मैं जिंदगी में वापस नहीं आऊंगा. लोगों ने चिट्ठी लिखी और कहा कि हम बाहर जा रहे हैं, हम आएंगे. किसी ने अपने बच्चों को किसी के घर रख दिया कि हम आएंगे, किसी ने अपने घर की चाबी पड़ोस में दे दी और कहा कि हम आएंगे. जो भी बॉर्डर क्रॉस करके गया वो यही कहता था कि मैं वापस आऊंगा. बहुत सारे लोग आ नहीं पाए. ये जो पिक्चर है एक बंदे की लव स्टोरी है.'
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इम्तियाज अली की फिल्मों में इतना दर्द क्यों होता है?
इम्तियाज अली लव स्टोरी और इमोशनल फिल्मों के लिए जाने जाते हैं. उनसे सवाल किया गया था कि आपकी फिल्मों में इतना दर्द क्यों होता है? कभी या तो हीरोइन मर जाती है या हीरो. इस पर उन्होंने हंसते हुए कहा, 'किसी के पास टाइगर बाम (Tiger Balm) है. शायद मेरे दर्द का निवारण हो जाए. दर्द की दवा. ऐसा कोई दर्द नहीं है. हम लोग बॉम्बे में बोलते हैं टेंशन लेने का नहीं, देने का. तो दर्द में दे रहा हूं.
हर फिल्ममेकर का फिल्म के साथ अजीब रिश्ता होता है. जब आप फिल्म बनाते हैं तो आपके वश में भी नहीं होता हैं. लिखते और बनाते वक्त कुछ और ही बन जाता है और जरूरी नहीं है कि जो दर्द हो वो खुद का हो. इतना तो दर्द नहीं है मेरी जिदंगी में कि मैं दस फिल्मों में उसको बांट दूं. अक्सर आप दूसरों की लाइफ तकलीफों और चुनौतियों से भी सेंसिटिव होते हैं.'
AI के फिल्मों में इस्तेमाल पर कही ये बात
इम्तियाज ने फिल्मों में AI के इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, 'मानवीय स्तर की अव्यवस्था और एआई के काम में हमेशा अंतर रहेगा.' उनके मुताबिक हमारे मन की अनियोजित और अव्यवस्थित शैली, कहानी कहने की कला को प्रासंगिक बनाए रखेगी.


























