24 नवंबर को दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन हो गया था. तब से फिल्म जगत में मातम परसा हुआ है। हाल ही में, 56वें ​​भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में, आमिर खान ने धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी और उनके साथ बिताए यादगार पलों को याद किया. बातचीत के दौरान, उन्होंने यह भी बताया कि धर्मेंद्र ने अपने निधन से पहले कौन सी फिल्म देखी थी.

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धर्मेंद्र ने निधन से पहले कौन सी फिल्म देखी थी? बता दें कि आमिर खान ने खुलासा किया है कि धर्मेंद्र ने अपने निधन से पहले  सनी देओल स्टारर अपकमिंग फिल्म 'लाहौर 1947' देखी थी. दरअसल 56वें ​​IFFI में बोलते हुए, आमिर खान ने कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि उन्हें धर्मेंद्र के निधन से पहले उनके साथ कुछ समय बिताने का मौका मिला था. आमिर ने कहा, "दरअसल, 'लाहौर 1947', जो फिल्म हमने सनी के साथ बनाई थी, मुझे उन्हें दिखाने का सौभाग्य मिला. इसलिए उन्होंने फिल्म देखी है." उन्होंने आगे कहा, "बेशक, यह अभी रिलीज़ नहीं हुई है. लेकिन मुझे बहुत खुशी है कि उन्हें यह फिल्म देखने का मौका मिला. क्योंकि यह उनकी फेवरेट स्क्रिप्ट्स में से एक थी."

क्यों धर्मेंद्र की प्रेयर मीट में नहीं पहुंचे आमिर खानइसी बातचीत में, आमिर ने 27 नवंबर को हुई धर्मेंद्र की प्रार्थना सभा को मिस करने के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा, "आज, दरअसल, मैं बॉम्बे में नहीं हूं, लेकिन दुर्भाग्य से आज उनकी प्रार्थना सभा है. मैं इसे मिस कर रहा हूं, और मैं उनके बहुत करीब था क्योंकि पिछले, मैं कहूँगा कि पिछले एक साल में, मैं उनसे लगभग 7-8 बार मिला हूं. क्योंकि मुझे उनकी कंपनी बहुत पसंद थी, इसलिए मैं उनके पास जाकर बैठता था."

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उन्होंने उस समय को भी याद किया जब वे अपने बेटे आज़ाद को धर्मेंद्र से मिलवाने ले गए थे. आमिर ने कहा, "एक दिन मैं आज़ाद को अपने साथ ले गया, बेट, मैंने कहा कि मैं तुम्हें किसी से मिलवाना चाहता हूं क्योंकि आज़ाद ने उनका काम नहीं देखा है. लेकिन आज़ाद मेरे साथ आए और हमने उनके साथ कुछ घंटे बिताए, और यह वाकई अमेजिंग था. आप जानते हैं, धर्मजी न केवल एक बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि एक बेहतरीन इंसान भी थे."

लाहौर 1947 के बारे मेंअसगर वजाहत के फेमस प्ले "जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्याई नी" पर आधारित यह फिल्म विभाजन के समय की कहानी है. कहानी एक मुस्लिम परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जो लखनऊ से लाहौर आकर बस जाता है और उसे एक हिंदू परिवार द्वारा खाली की गई हवेली दे दी जाती है. हालांकि, चीजें तब नाटकीय मोड़ लेती हैं जब उन्हें पता चलता है कि हिंदू परिवार अभी भी घर में रह रहा है और जाने से इनकार कर रहा है. सनी देओल और प्रीति जिंटा के साथ, लाहौर 1947 में शबाना आज़मी, अली फज़ल और करण देओल भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं.