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पुरी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने 2026 के कैलेंडर को लेकर माफी क्यों मांगी?
कैलेंडर में भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा को गलत स्थिति में दर्शाया गया था।
कैलेंडर में मंदिर के निर्माण से संबंधित गलत जानकारी थी।
कैलेंडर में इस्तेमाल की गई भाषा भक्तों की भावनाओं को आहत करने वाली थी।
कैलेंडर में भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा को गलत स्थिति में दर्शाया गया था।
कैलेंडर में छपी तस्वीरें ओडिशा राज्य संग्रहालय से चुराई गई थीं।
2026 के कैलेंडर में छपी तस्वीरें किससे प्रेरित थीं?
ओडिशा राज्य संग्रहालय में संरक्षित एक सदी पुरानी ताड़ के पत्तों की पांडुलिपि से
आधुनिक चित्रकारों की शैली से
मंदिर के पुजारियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों से
ओडिशा राज्य संग्रहालय में संरक्षित एक सदी पुरानी ताड़ के पत्तों की पांडुलिपि से
विभिन्न ऐतिहासिक किताबों में मौजूद चित्रों से
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कैलेंडर में कौन सी मुख्य गलती पाई गई?
कैलेंडर में भगवान जगन्नाथ के स्थान पर बलभद्र को दर्शाया गया था।
कैलेंडर में तारीखें गलत थीं।
कैलेंडर में भगवान जगन्नाथ के स्थान पर बलभद्र को दर्शाया गया था।
कैलेंडर में मंदिर के सेवकों के नाम गलत लिखे गए थे।
कैलेंडर में रथ यात्रा का कोई चित्र नहीं था।
कैलेंडर में रथ यात्रा के चित्र में क्या त्रुटि थी?
देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ सबसे पहले खींचा जा रहा था, जो परंपरा के विरुद्ध था।
रथों को गलत दिशा में खींचा जा रहा था।
रथों का रंग गलत था।
देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ सबसे पहले खींचा जा रहा था, जो परंपरा के विरुद्ध था।
रथ यात्रा का चित्र अस्पष्ट था।
इस मामले में एसजेटीए ने क्या कदम उठाया?
कैलेंडर की बिक्री पर रोक लगाई और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
कैलेंडर की बिक्री जारी रखने का फैसला किया।
मामले पर कोई ध्यान नहीं दिया।
कैलेंडर की बिक्री पर रोक लगाई और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
गलतियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
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