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देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु को सिंघाड़ा क्यों चढ़ाया जाता है?
यह एक महंगा फल है जिसे चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं।
यह एक मौसमी फल है जो आसानी से उपलब्ध होता है।
यह जल में उत्पन्न होता है और जल-तत्व का प्रतीक है, जो भगवान विष्णु के क्षीरसागर से उठने का प्रतीक है।
यह एक स्वादिष्ट फल है जिसे भगवान विष्णु खाना पसंद करते हैं।
देवउठनी एकादशी का मुख्य अर्थ क्या है?
भगवान विष्णु का विवाह समारोह।
भगवान विष्णु का चार महीने की योगनिद्रा से जागना और शुभ कार्यों की शुरुआत।
सिर्फ सिंघाड़ा फल का त्यौहार।
मौसम परिवर्तन का उत्सव।
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सिंघाड़ा शरीर के लिए कैसे फायदेमंद है?
यह शरीर को केवल स्वाद प्रदान करता है।
यह शरीर को गर्मी प्रदान करता है।
यह शरीर को ऊर्जा, ठंडक, मिनरल्स प्रदान करता है और जल-तत्व का संतुलन बनाए रखता है।
इसका शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
देवउठनी एकादशी पर तुलसी-शालिग्राम विवाह किसका प्रतीक है?
सिर्फ तुलसी और शालिग्राम के मिलन का।
पृथ्वी और जल के मिलन का दैवी संदेश, जो सृष्टि के पुनः सक्रिय होने का प्रतीक है।
भगवान विष्णु और लक्ष्मी के मिलन का।
केवल विवाह समारोह का।
इस परंपरा से हम क्या सीख सकते हैं?
सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान करना।
जीवन में जल तत्व की कोई भूमिका नहीं होती।
जीवन का संतुलन तभी संभव है जब भीतर की शांति और भावनाएं शुद्ध रहें, जैसे जल प्रवाहशील होता है।
हमें जीवन में बदलाव नहीं लाना चाहिए।
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