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इस्लाम में ताबीज पहनने के बारे में क्या विचार है?
ताबीज पहनना हमेशा जायज़ है, चाहे उसमें कुछ भी लिखा हो।
ताबीज पहनना जायज़ है यदि उसमें कुरान की आयतें न लिखी हों।
इस्लाम में ताबीज पहनना हराम (अवैध) है यदि उसमें जादुई शक्तियों पर विश्वास हो या कुरान की आयतों के अलावा कुछ और लिखा हो, या यदि यह अल्लाह के बजाय किसी वस्तु पर भरोसा करने जैसा हो।
ताबीज पहनना पूरी तरह से जायज़ है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसमें क्या लिखा है।
विद्वानों के अनुसार, ताबीज को क्या माना जा सकता है?
यह हमेशा एक पवित्र वस्तु है जो हर मुसलमान को पहननी चाहिए।
इसे हमेशा कुरान के पाठ से अलग नहीं किया जा सकता।
यह एक माध्यम है जो केवल लाभ प्रदान कर सकता है।
कुछ मामलों में, ताबीज को 'शिर्क' माना जा सकता है, विशेष रूप से जब यह विश्वास किया जाता है कि इसमें सुरक्षा या लाभ प्रदान करने की शक्ति है, जो अल्लाह की एकता के विश्वास के विरुद्ध है।
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इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, आध्यात्मिक सुरक्षा के लिए क्या अनुशंसा की जाती है?
ताबीज पहनना और उन पर भरोसा करना।
पवित्र स्थानों पर जाना।
केवल ताबीज पर निर्भर रहना, कुरान का पाठ करना या दुआएँ पढ़ना ज़रूरी नहीं।
कुरान की आयतों का पाठ करना या पैगंबर की दुआओं का पाठ करना।
कुरान में किस आयत में इस बात का उल्लेख है कि केवल अल्लाह ही नुकसान या फायदा पहुंचा सकता है?
सूरा अल-इखलास (112:1)
सूरा अल-बक़रह (2:255)
सूरा अल-अराफ (7:188)
सूरा अन-नूर (24:35)
पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ताबीज के बारे में क्या कहा है?
उन्होंने ताबीज पहनने की सलाह दी।
उन्होंने ताबीज को ज़रूरी माना।
उन्होंने ताबीज को शिर्क कहा है।
उन्होंने ताबीज के बारे में कोई बात नहीं की।
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