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उत्तर भारत में शादियां रात में क्यों आयोजित की जाती हैं?
यह एक आधुनिक फैशन ट्रेंड है जो अब लोकप्रिय हो गया है।
रात में शादियां करने से परिवार पर वित्तीय बोझ कम होता है।
मुगल और अफगान हमलों के डर से, लोग रात में छिपकर शादियां करते थे, जो बाद में एक परंपरा बन गई।
रात में शादियां अधिक रोमांटिक होती हैं और अधिक मेहमानों को आमंत्रित किया जा सकता है।
दक्षिण भारत में शादियां दिन के समय क्यों आयोजित की जाती हैं?
दिन के समय शादियां करने से यातायात की समस्या कम होती है।
सूर्य देव की पूजा का महत्व होने के कारण, दिन को शुभ माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक है।
दिन में शादियां अधिक किफायती होती हैं क्योंकि बिजली की आवश्यकता नहीं होती।
यह एक सामाजिक दबाव है क्योंकि सभी दक्षिण भारतीय ऐसा करते हैं।
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दक्षिण भारत में शादियों में मंडप कैसे बनाए जाते हैं?
मंडप विशेष रूप से वातानुकूलित हॉल में बनाए जाते हैं।
मंडप शहर के व्यस्त चौराहों पर बनाए जाते हैं ताकि अधिक लोग देख सकें।
मंडप खुले आंगन में बनाए जाते हैं और केले के पत्तों से सजाए जाते हैं।
मंडप पूरी तरह से धातु और कांच से बने होते हैं।
उत्तर भारत में शादी की टाइमिंग का मुख्य आधार क्या है?
उत्तर भारत में दिन के समय शादियां आयोजित करना अनिवार्य है।
उत्तर भारत में शादी मुहूर्त और लग्न पर निर्भर करती है, दिन और रात पर नहीं।
उत्तर भारत में शादियां पूरी तरह से परिवार की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करती हैं।
उत्तर भारत में शादियां सिर्फ सांस्कृतिक समारोह होती हैं।
दक्षिण और उत्तर भारत की शादियों की टाइमिंग में अंतर का मूल कारण क्या है?
दोनों क्षेत्रों में मनोरंजन के अलग-अलग तरीके हैं।
दोनों क्षेत्रों में भोजन की पसंद अलग-अलग है।
दोनों क्षेत्रों की परंपराएं, रीति-रिवाज और शादी की पद्धति अलग-अलग हैं।
दोनों क्षेत्रों में दुल्हनों का पहनावा अलग-अलग होता है।
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