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प्रेमानंद महाराज के अनुसार, सच्ची शांति और आनंद कब मिलता है?
जब हम अपने गुरुदेव की शरण में जाते हैं।
जब हम बहुत धन कमाते हैं और भौतिक सुखों का आनंद लेते हैं।
जब हम दुनिया की सभी समस्याओं से दूर भागते हैं।
जब हम अपने गुरुदेव की शरण में जाते हैं।
जब हम केवल मंदिर में पूजा करते हैं, लेकिन गुरु की आज्ञा का पालन नहीं करते।
प्रेमानंद महाराज ने गुरु को क्या बताया है?
वह दिव्य सेतु जो जीव को श्यामा-श्याम तक पहुंचाते हैं।
एक साधारण व्यक्ति जो हमें ज्ञान देता है।
एक शिक्षक जो हमें स्कूल ले जाता है।
वह दिव्य सेतु जो जीव को श्यामा-श्याम तक पहुंचाते हैं।
एक ऐसा व्यक्ति जो केवल भौतिक सुखों के बारे में सिखाता है।
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गुरुदेव की असली आराधना क्या है, प्रेमानंद महाराज के अनुसार?
उनके बताए मार्ग का पालन करना।
केवल फूल, दीप और आरती चढ़ाना।
विभिन्न प्रकार की मिठाइयाँ बनाना।
उनके बताए मार्ग का पालन करना।
किसी भी आराधना में भाग न लेना।
सच्ची गुरु भक्ति का अर्थ क्या है, प्रेमानंद महाराज के अनुसार?
तन, मन और आत्मा से समर्पण होना।
केवल गुरु की बातों को सुनना, लेकिन उन पर अमल न करना।
तन, मन और आत्मा से समर्पण होना।
केवल गुरु के बारे में बातें करना।
गुरु की उपेक्षा करना।
प्रेमानंद महाराज के अनुसार साधना का सबसे बड़ा नियम क्या है?
गुरु की आज्ञा का पालन करना।
हजार जप करना।
गुरु की आज्ञा का पालन करना।
केवल ध्यान करना।
किसी भी नियम का पालन न करना।
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