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शशि थरूर के लेख का मुख्य विषय क्या था?
भारतीय राजनीति में वंशवाद की समस्या
भारत में राजनीतिक दलों का संगठन
भारतीय राजनीति में वंशवाद की समस्या
कांग्रेस पार्टी की आंतरिक नीतियां
शहजाद पूनावाला की राजनीतिक विचारधारा
शशि थरूर ने अपने लेख में वंशवादी राजनीति के कारण क्या नुकसान बताए हैं?
नेताओं को जमीनी जुड़ाव से कोई मतलब नहीं होता
शासन की गुणवत्ता में सुधार होता है
नेताओं को जमीनी जुड़ाव से कोई मतलब नहीं होता
राजनीतिक दलों में अधिक पारदर्शिता आती है
मतदाताओं को उनके नेताओं को चुनने में अधिक स्वतंत्रता मिलती है
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शहजाद पूनावाला ने शशि थरूर के लेख पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उन्होंने लेख की प्रशंसा की और थरूर को खतरों का खिलाड़ी बताया, साथ ही गांधी परिवार से सावधान रहने की चेतावनी दी।
उन्होंने लेख की निंदा की और थरूर को भाजपा में शामिल होने की सलाह दी।
उन्होंने लेख की प्रशंसा की और थरूर को खतरों का खिलाड़ी बताया, साथ ही गांधी परिवार से सावधान रहने की चेतावनी दी।
उन्होंने लेख को महत्वहीन बताया और थरूर पर कांग्रेस पार्टी का समर्थन करने का आरोप लगाया।
उन्होंने लेख पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
शशि थरूर ने वंशवाद की जगह योग्यता आधारित राजनीति लाने के लिए क्या सुधार सुझाए?
कानूनी रूप से तय कार्यकाल की सीमा लागू करना, राजनीतिक दलों में आंतरिक चुनाव कराना और मतदाताओं को शिक्षित करना।
राजनीतिक दलों को बंद कर देना चाहिए।
केवल वंशवादी नेताओं को ही चुनाव लड़ने की अनुमति देनी चाहिए।
कानूनी रूप से तय कार्यकाल की सीमा लागू करना, राजनीतिक दलों में आंतरिक चुनाव कराना और मतदाताओं को शिक्षित करना।
किसी भी सुधार की आवश्यकता नहीं है, वंशवाद एक अच्छी प्रणाली है।
शहजाद पूनावाला ने 'पहला परिवार' कहकर किसका जिक्र किया?
गांधी परिवार का
भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का
गांधी परिवार का
लेखकों के एक समूह का
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