पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव के बाद जारी एग्जिट पोल राज्य की राजनीति में एक संभावित बड़े बदलाव की आहट दे रहे हैं. चाणक्य स्ट्रैटेजीज के सर्वे के मुताबिक मुकाबला बेहद करीबी है, लेकिन बढ़त BJP+ गठबंधन के पक्ष में जाती दिख रही है. खास बात यह है कि ये अनुमान 2021 के चुनाव परिणामों के मुकाबले एक बड़े राजनीतिक पुनर्संतुलन की ओर संकेत करते हैं.

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सीटों का गणित: सत्ता बदलने की दहलीज पर?

एग्जिट पोल के अनुसार, BJP+ गठबंधन को 150 से 160 सीटें मिलने का अनुमान है. यह आंकड़ा बहुमत के जादुई नंबर 148 से ऊपर है, यानी अगर रुझान नतीजों में तब्दील होते हैं तो राज्य में सत्ता परिवर्तन संभव है. 2021 के चुनाव में BJP को 77 सीटें मिली थीं. उस आधार से देखें तो यह लगभग दोगुनी बढ़त का संकेत है. दूसरी ओर, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाला AITC+ गठबंधन 130 से 140 सीटों पर सिमटता दिख रहा है. 2021 में AITC ने 215 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया था.

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ऐसे में 70-80 सीटों की संभावित गिरावट सिर्फ एंटी-इंकंबेंसी नहीं, बल्कि वोट ट्रांसफर और संगठनात्मक चुनौती की कहानी भी कहती है. कांग्रेस (INC) इस चुनाव में भी हाशिए पर नजर आ रही है. उसे 2 से 4 सीटें मिलने का अनुमान है. कांग्रेस के लिए संतोष बस इतना है कि पिछली बार के मुकाबले उसका खाता खुल रहा है. वहीं अन्य दलों और निर्दलीयों के खाते में 4 से 6 सीटें जा सकती हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि मुख्य लड़ाई दो ध्रुवों BJP+ और AITC+ के बीच सिमट चुकी है.

वोट शेयर: छोटे अंतर का बड़ा असर

वोट प्रतिशत के स्तर पर भी मुकाबला बेहद कड़ा है. BJP+ को 43% से 45% वोट मिलने का अनुमान है, जो 2021 के 38.15% वोट शेयर से स्पष्ट बढ़त दिखाता है. यह इशारा करता है कि पार्टी ने अपने वोट बैंक का विस्तार किया है.सं भवतः सीमांत क्षेत्रों, शहरी बेल्ट और कुछ परंपरागत AITC गढ़ों में भी सेंध लगाई है. वहीं AITC+ का वोट शेयर 40% से 43% के बीच रहने का अनुमान है, जो 2021 के 48.02% से नीचे है. यह गिरावट संकेत देती है कि पार्टी का कोर वोट पूरी तरह खिसका नहीं है, लेकिन उसका एक हिस्सा दूसरे खेमों में शिफ्ट हुआ है या वोटिंग टर्नआउट के पैटर्न बदले हैं.

कांग्रेस का वोट शेयर 3% से 6% के बीच रहने का अनुमान है, जबकि अन्य दलों को 8% से 10% वोट मिल सकते हैं. यह बिखराव खासकर उन सीटों पर निर्णायक हो सकता है जहां जीत का अंतर बहुत कम रहता है.

करीबी मुकाबला: ‘मार्जिन’ बनेगा निर्णायक कारक

एग्जिट पोल भी यही बताती है कि दोनों प्रमुख गठबंधन सीटों और वोट शेयर के लिहाज से एक-दूसरे के बेहद करीब हैं. 2-3 प्रतिशत वोट का अंतर कई सीटों पर परिणाम पलट सकता है. बंगाल जैसे राज्य में, जहां बहुकोणीय मुकाबले और स्थानीय समीकरण मजबूत होते हैं, वहां यह छोटा अंतर 20-30 सीटों तक का फर्क पैदा कर सकता है. यानी तस्वीर साफ है- मुकाबला सीधा है, लेकिन परिणाम सूक्ष्म गणित पर निर्भर करेगा: बूथ-स्तर का स्विंग, उम्मीदवार चयन, स्थानीय गठजोड़ और टर्नआउट का भूगोल.

एग्जिट पोल एक संभावित दिशा जरूर दिखाते हैं, अंतिम सत्य नहीं। पश्चिम बंगाल में पहले भी एग्जिट पोल और वास्तविक नतीजों के बीच अंतर देखा गया है. लेकिन इस बार के आंकड़े अगर करीब-करीब सही बैठते हैं, तो राज्य में सत्ता का संतुलन बदल सकता है और यह बदलाव 2021 के जनादेश के उलट एक नई राजनीतिक धुरी स्थापित करेगा.