Tamilnadu Election 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, सियासी पारा तेज होता जा रहा है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सोमवार को कोलाथुर सीट से नामांकन दाखिल कर चुनावी बिगुल बजा दिया. नामांकन के तुरंत बाद उन्होंने रोड शो किया, जहां समर्थकों की भीड़ ने साफ संकेत दिया कि इस बार मुकाबला और ज्यादा तीखा होने वाला है.

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स्टालिन ने आत्मविश्वास से भरे अंदाज में बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा, “हमारी जीत इस बार बहुत शानदार होगी. पिछली तीन बार की तुलना में इस बार मुझे जबरदस्त समर्थन मिल रहा है. तमिलनाडु दिल्ली के खिलाफ लड़ रहा है. इस बार जीत बहुत बड़ी होने वाली है.”

 

उनके इस बयान को सिर्फ चुनावी बयानबाजी नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जहां DMK खुद को “दिल्ली बनाम तमिलनाडु” के नैरेटिव में स्थापित करने की कोशिश कर रही है.

इस चुनाव में DMK 234 में से 164 सीटों पर खुद चुनाव लड़ रही है, जबकि 70 सीटें सहयोगी दलों को दी गई हैं. कांग्रेस को 28 सीटें, CPI और CPI(M) को 5-5 सीटें, VCK को 8 और MDMK को 4 सीटें मिली हैं. इसके अलावा DMDK, IUML और अन्य क्षेत्रीय दल भी गठबंधन का हिस्सा हैं.  यह गठबंधन समीकरण साफ करता है कि DMK इस बार भी मजबूत सामाजिक और राजनीतिक आधार के साथ मैदान में उतर रही है.

DMK फिर सत्ता में आएगी-कनिमोझी का भरोसा

DMK सांसद कनिमोझी ने भी पार्टी की वापसी को लेकर भरोसा जताया. उन्होंने कहा, “हमें पूरा विश्वास है कि DMK फिर से सत्ता में लौटेगी.लोग पूरी तरह आश्वस्त हैं कि वे किसे वोट देंगे और उन्हें भरोसा है कि DMK फिर से अच्छी सरकार देगी.”

उन्होंने आगे जोड़ा, “पिछले 5 साल में मुख्यमंत्री ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा किया है और जितना वादा किया था उससे भी ज्यादा किया है.”

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यह बयान DMK के उस नैरेटिव को मजबूत करता है, जिसमें वह अपने शासन को “डिलीवरी मॉडल” के रूप में पेश कर रही है.

विपक्ष का पलटवार, ‘झूठे वादों’ का आरोप

दूसरी तरफ AIADMK ने DMK के “सुपरस्टार मैनिफेस्टो” पर तीखा हमला बोला है. पार्टी नेता सीटी चेल्लापांडियन ने आरोप लगाया, “तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अब 2000 वादे किए हैं. 2021 के चुनाव में किए गए 525 वादों में से 25 भी पूरे नहीं हुए.उन्हें झूठ बोलने की आदत हो गई है.”

उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के भी आरोप लगाए. उनके मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले दी जा रही योजनाएं सिर्फ वोट पाने की कोशिश हैं.

मैनिफेस्टो बना चुनावी केंद्र

स्टालिन के “सुपरस्टार मैनिफेस्टो” ने इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है. महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता, युवाओं के लिए नौकरी और स्किल ट्रेनिंग, किसानों के लिए बेहतर कीमत और मुफ्त सुविधाएं, इन वादों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है. लेकिन विपक्ष इसे “कॉपी-पेस्ट” और “स्टिकर पॉलिटिक्स” बता रहा है.

क्या कहता है चुनावी गणित?

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा और 4 मई को नतीजे आएंगे. 234 सीटों पर होने वाला यह चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि नैरेटिव की जंग भी है—विकास बनाम वादे, और क्षेत्रीय पहचान बनाम राष्ट्रीय राजनीति.

स्टालिन का “बहुत बड़ी जीत” वाला दावा कितना सही साबित होता है, यह तो नतीजों के दिन साफ होगा, लेकिन इतना तय है कि इस बार तमिलनाडु की राजनीति में दांव बड़ा है और मुकाबला भी.