नई दिल्ली: धनबल के आधार चुनाव को प्रभावित होने से रोकने के लिए चुनाव आयोग ने प्रचार के दौरान कितना पैसा एक उम्मीदवार खर्च कर सकता है इसको लेकर सख्त नियम बनाए हैं. चुनाव आयोग एक उम्मीदवार कितना खर्च करेगा यह तय करता है.समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अमेरिका के एक चुनाव विशेषज्ञ ने कहा है कि आगामी आम चुनाव भारत के इतिहास में सबसे महंगा चुनाव होगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि एक उम्मीदवार कितना खर्च कर सकता है और अगर वह नियम तोड़ता है तो क्या होता है.
कितना खर्च कर सकता है एक उम्मीदवार
नियम के मुताबिक एक उम्मीदवार लोकसभा चनाव में 50 लाख रुपये से 70 लाख रुपये तक खर्च कर सकता है. उसका खर्च उस राज्य पर भी निर्भर करता है जहां से वह चुनाव लड़ रहा है. अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम को छोड़कर सभी राज्यों में एक उम्मीदवार अधिकतम 70 लाख रुपये खर्च कर सकता है. अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम में उम्मीदवार 54 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं. यह दिल्ली के लिए 70 लाख रुपये और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 54 लाख रुपये है. वहीं, विधानसभा चुनाव के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये से 28 लाख रुपये के बीच है.
इसमें एक राजनीतिक पार्टी द्वारा खर्च किया गया धन या उम्मीदवार के अभियान के लिए एक समर्थकों द्वारा खर्च किया गया धन शामिल है. लेकिन इसमें पार्टी के कार्यक्रम के प्रचार के लिए किसी पार्टी या किसी पार्टी के नेता द्वारा किए गए खर्च को कवर नहीं किया जाता है.
उम्मीदवारों को एक अलग खाता रखना होता है और कानून के तहत उसमें चुनाव खर्च को दर्ज करना होता है. खर्च की गलत जानकारी और तय खर्च सीमा से अधीक खर्च करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 10 ए के तहत तीन साल तक के लिए अयोग्यता का कारण बन सकता है.
सभी पंजीकृत राजनीतिक दलों को लोकसभा चुनावों के पूरा होने के 90 दिनों के भीतर अपने चुनाव खर्च का एक बयान चुनाव आयोग को देना होता है. सभी उम्मीदवारों को चुनाव पूरा होने के 30 दिनों के भीतर अपने खर्च का विवरण मतदान कक्ष में प्रस्तुत करना होगा. लोकसभा चुनाव पर कितना खर्च होता हैपहले तीन आम चुनावों को कराने में 10 करोड़ रुपये के बराबर या उससे कम खर्च हुआ था. जबकि, 1984-85 में आठवें आम चुनाव तक यह खर्च 100 करोड़ रुपये से कम था. 1996 में 11 वें आम चुनाव के दौरान यह पहली बार 500 करोड़ रुपये को पार कर गया और 2004 में 14 वें आम चुनाव के दौरान 1,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया. 2014 के आखिरी लोकसभा चुनावों में 3,870 करोड़ रुपये का खर्च हुआ जो 2009 में 15वें आम चुनाव के लिए किए गए खर्च से तीन गुना अधिक था.
यह भी देखें
