केरल विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल साफ तस्वीर पेश कर रहे हैं कि कांग्रेस नीत यूडीएफ (UDF) न सिर्फ आगे है, बल्कि आरामदायक बढ़त के साथ सत्ता के करीब खड़ा दिख रहा है. पोल मंत्रा के एक्जिट पोल के मुताबिक 88 से 92 सीटों का अनुमान उसे 70 के बहुमत आंकड़े से काफी ऊपर ले जाता है. इसके मुकाबले सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF) 42 से 46 सीटों पर सिमटता दिख रहा है, जो कई क्षेत्रों में उसके कमजोर पड़ने का संकेत है. एनडीए और अन्य दल इस बार भी हाशिये पर ही नजर आ रहे हैं, लेकिन कहानी सिर्फ सीटों की नहीं है. असली दिलचस्पी उस नेतृत्व की दौड़ में है, जहां मुकाबला अब भी खुला और कड़ा बना हुआ है.

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जमीन पर क्या कह रही है हवा?

पोल मंत्रा के एक्जिट पोल की अगर बात करें तो राज्य के अलग-अलग हिस्सों से जो संकेत मिल रहे हैं, वे एकतरफा नहीं, लेकिन स्पष्ट झुकाव जरूर दिखाते हैं. मालाबार क्षेत्र में यूडीएफ ने नैरेटिव पर मजबूत पकड़ बना ली है. मध्य केरल में यह बढ़त और ज्यादा होती दिख रही है. त्रावणकोर में मुकाबला जरूर है, लेकिन वह इतना नहीं कि पूरे राज्य की तस्वीर बदल सके. 

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इन रुझानों का मतलब साफ है कि यहां अब क्लोज फाइट नहीं दिखती, बल्कि जनमत का स्पष्ट झुकाव नजर आता है. एलडीएफ के पास अब भी कुछ मजबूत क्षेत्र हैं, लेकिन राज्यव्यापी लहर उससे दूर जाती दिख रही है.

कौन बना रहा है नैरेटिव ?

पोल मंत्रा के अनुसार पिछले 60 दिनों में चुनावी चर्चा किसी एक चेहरे के इर्द-गिर्द नहीं रही. कई नेताओं ने मिलकर राजनीतिक माहौल गढ़ा है. इस दौर में केसी वेणुगोपाल (21.4%) सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने नैरेटिव को दिशा दी. उनके बाद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (18.6%) का प्रभाव कायम है, जबकि वी.डी. सतीशन (16.2%) भी करीब बने हुए हैं. इसके अलावा शशि थरूर (12.5%) और शफी परम्बिल (10.1%) जैसे नेताओं ने भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. यहां यूडीएफ सिर्फ सीटों में ही नहीं, बल्कि विमर्श के स्तर पर भी आगे है. वहीं एलडीएफ का प्रभाव अधिकतर पिनराई विजयन तक सीमित नजर आता है.

CM चेहरा: खुली और कड़ी टक्कर

दिलचस्प बात ये है कि इतनी स्पष्ट बढ़त के बावजूद मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर तस्वीर साफ नहीं है. पोल मंत्रा के सर्वे में यह मुकाबला पूरी तरह खुला और प्रतिस्पर्धी बना हुआ है. वी.डी. सतीशन 21.2% के साथ मामूली बढ़त में हैं, लेकिन पिनराई विजयन 20.5% के साथ बिल्कुल करीब हैं. केसी वेणुगोपाल 17.8% के साथ तीसरे स्थान पर हैं और यही उन्हें इस दौड़ का ‘डार्क हॉर्स’ बनाता है. इसके बाद के स्तर पर के.के. शैलजा और रमेश चेन्निथला 11.2% के साथ बराबरी पर हैं, जबकि राजीव चंद्रशेखर 10.5% के साथ मुकाबले में बने हुए हैं.

केरल चुनाव के राजनीतिक संकेत

सबसे बड़ा संकेत यही है कि मतदाता किसी एक चेहरे के पीछे नहीं खड़े हैं. तीनों शीर्ष नेता एक-दूसरे के बेहद करीब हैं, यानी आखिरी फैसला अभी खुला है. यूडीएफ के लिए यह स्थिति फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि उसके पास कई मजबूत चेहरे हैं. वहीं एलडीएफ अब भी पिनराई विजयन के नेतृत्व पर ज्यादा निर्भर नजर आता है.

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